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अपनी कार्रवाई के बचाव के साथ पाक की कूटनीतिक नाकेबंदी भी तेज कर रहा भारत

वायुसेना को इस ऑपरेशन पर किसी बयानबाज़ी से दूर रखने की एक बड़ी वजह थी कि भारत दुनिया को दो परमाणु शक्तियों के बीच सैनिक टकराव का खतरे की घण्टी बजाता सन्देश नहीं देना चाहता था.

नई दिल्लीः पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों को हवाई हमलों से ठिकाने लगाने के साथ ही भारत ने अपने इस कदम पर कूटनीतिक लामबन्दी भी तेज कर दी है. पाक के बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद के आतंकी ठिकाने को नष्ट करने पर आधिकारिक बयान जारी करने भारत ने जहां नई दिल्ली में विदेशी रजनयिकों को इसकी जानकारी दी. वहीं अपने सभी राजदूतों को भी मेज़बान सरकार से सम्पर्क कर इस कार्रवाई व इसकी ज़रूरत के बारे में बताने को कहा गया है.

सूत्रों मुताबिक विदेश सचिव ने अमेरिका, रूस, फ्रांस, चीन और ब्रिटेन समेत संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद सदस्य देशों के राजदूतों को दिल्ली में इस कार्रवाई की जानकारी दी. साथ ही विदेश मन्त्रालय के अन्य सचिव स्तर अधिकारियों ने अन्य देशों के राजदूतों को बताया कि भारत के लिए आतंकवाद के खतरे से निपटने के लिए क्यों इस तरह की कार्रवाई करना ज़रूरी हो गया था. साथ ही यह भी समझने का प्रयास होगा कि भारत किसी तरह का सैन्य टकराव नहीं चाहता है.

ताज़ा सर्जिकल स्ट्राइक पर दुनिया में किस तरह संदेश दिया जाए इसका भी बेहद खास ध्यान दिया गया. पूरा ध्यान रखा जा रहा है कि इस ऑपरेशन के औपचारिक बयानों में कहीं न सेना नज़र आए और न ही उसका उल्लेख किया जाए. ध्यान रहे कि कैमरों के आगे विदेश सचिव की तरफ से दिए गए बयान में वायुसेना के उल्लेख तक नहीं है. वहीं इसे असैन्य कार्रवाई करार देते हुए भारत मे किसी सैन्य टकराव की गुंजाइश को भी कम करने का प्रयास किया.

याद रहे कि उड़ी आतंकी हमले के बाद सितंबर 2016 में हुई सर्जिकल स्ट्राइक के बाद जहां डीजीएमओ और विदेश मन्त्रालय प्रवक्ता ने इसका ऐलान किया था वहीं इस बार मोर्चा विदेश सचिव ने संभाला. सूत्र बताते हैं कि वायुसेना को इस ऑपरेशन पर किसी बयानबाज़ी से दूर रखने की एक बड़ी वजह थी कि भारत दुनिया को दो परमाणु शक्तियों के बीच सैनिक टकराव का खतरे की घण्टी बजाता सन्देश नहीं देना चाहता था.

ख्याल रखा जा रहा है कि पाकिस्तान को आतंकवाद के खिलाफ दिए इस सख्त सन्देश की भाषा भी बेहद सधी रहे. सोची समझी रणनीति के तहत ही इस ऑपरेशन के बारे में आधिकारिक तौर पर बोलने के लिए विदेश मन्त्रालय को अगुवा बनाया गया. विदेश सचिव विजय गोखले ने 25-26 फरवरी की मध्यरात्रि हुए इस वार परऔपचारिक बयान दिया. वहीं विभिन्न राजनीतिक दलों को इस ऑपरेशन के बारे में जानकारी देने की ज़िम्मेदारी विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की अगुवाई में आला मंत्रियों को दी गई. इस बाबत सर्वदलीय बैठक भी दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू भवन स्थित विदेश मंत्रालय में ही आयोजित की गई.

हालांकि, सूत्र बताते हैं कि भारत ने इस कार्रवाई के लिए जमीन 14 फरवरी के हमले के फौरन बाद ही तैयार करना शुरू कर दिया था. सीआरपीएफ के 40 जवानों की जान लेने वाले पुलवामा आतंकी हमले के बाद से ही भारत ने सीमापार आतंकवाद पर पाकिस्तान को बेनकाब करने की कवायद तेज करते हुए सभी अहम देशों के रजनयिकों को इस बारे में ब्रीफ किया था. सूत्रों के मुताबिक अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन के साथ हुए 16 फरवरी को हुए फोन संवाद में भारतीय एनएसए ने इस बात को साफ भी कर दिया था कि भारत आत्मरक्षा का अधिकार.सुरक्षित रखता है. इस बाबत बोल्टन की तरफ से आए बयान में भी कहा गया था कि हम भारत के आत्मरक्षा के अधिकार का सम्मान करते हैं.

सूत्रों के मुताबिक ताज़ा सर्जिकल स्ट्राइक के बाद आतंकवाद को लेकर पाकिस्तान के खिलाफ़ भारत का दबाव अभी कम नहीं होने जा रहा. आने वाले दिनों में भी भारत आतंकवाद पर पाकिस्तान की आर्थिक नाकेबन्दी से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसे बेपर्दा करने के मुहिम को बरकरार रखेगा. इस कड़ी में जल्द ही जैश-ए-मोहम्मद सरगना मसूद अजहर को संयुक्त राष्ट्र की प्रतिबंधित सूची में डलवाने के लिए नया प्रस्ताव शामिल है. इस काम में फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका पहले ही अपना सहयोग जतया चुके हैं. फ्रांस इसकी अगुवाई की बात स्वीकार कर चुका है.

गौरतलब है कि सोमवार को ही रक्षा मंत्रालय ने विभिन्न भारतीय दूतावासों में तैनात सैन्य अधिकारियों की एक बैठक बुलाई थी. सूत्रों के मुताबिक भारत के मिलिट्री से जुड़े अधिकारियों को भी अपने सम्पर्क संवाद के दौरान भारत के खिलाफ सीमापार से चलाए जा रहे छद्म युद्व और आतंकवाद पर सक्रियता से पक्ष रखने को कहा गया था.

पठानकोट से लेकर पिछले आतंकी हमलों के बाद सरकार लगातार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की नाकेबंदी का दबाव बनाए रखा है.

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