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एम्स-डब्ल्यूएचओ ने मिलकर इन इलाकों में किया सीरो सर्वे, पॉजिटिविटी दर 62.3 प्रतिशत

डब्ल्यूएचओ और नई दिल्ली एम्म मिलकर सीरोप्रवलेंस स्टडी की. एबसीरोप्रवलेंस स्टडी देश के अलग अलग इलाकों में की गई. इस सर्वे में शहरी और ग्रामीण दोनो इलाकों को शामिल किया गया है.

नई दिल्लीः एम्स, नई दिल्ली के नेतृत्व में डब्ल्यूएचओ-एम्स सीरोप्रवलेंस स्टडी की, रिसर्च के प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर एम्स के कम्युनिटी मेडिसिन में डॉ पुनीत मिश्रा ने किया. एबसीरोप्रवलेंस स्टडी दिल्ली, बल्लभगढ़ (फरीदाबाद), गोरखपुर, भुवनेश्वर और अगरतला में की गई है. इसमे शहरी और ग्रामीण दोनो इलाके शामिल है. 4509 लोगों को स्टडी में शामिल किया गया जिसमें से 2811 सीरो पॉजिटिव पाए गए. यानी 62.3% सीरो पॉजिटिविटी दर है. 

स्टडी की बड़ी बातें 

- दक्षिणी दिल्ली के शहरी क्षेत्र में रिसेटलेमेंट कॉलोनी, जिसमें बहुत भीड़भाड़ वाली आबादी है, दूसरी लहर से पहले भी 74.7% की सीरोप्रवलेंस थी (किसी भी सीरो-मूल्यांकन में सबसे अधिक रिपोर्ट की गई) .

- दक्षिण दिल्ली में 0-18 आयु वर्ग (स्कूल जाने वाले) आयु वर्ग में 73.9% सीरोप्रवलेंस पाई गई जितनी 18 साल से ज्यादा उम्र के लोगों थी.  

- दिल्ली और एनसीआर खासकर फरीदाबाद के इन क्षेत्रों में तीव्र दूसरी लहर के बाद ज्यादा सीरोप्रवलेंस हो सकता है. संभवतः, सेरोप्रवलेंस के ये स्तर किसी भी 'तीसरी लहर' के खिलाफ सुरक्षात्मक हो सकते हैं.

- साथ ही दिल्ली के भीड़भाड़ वाले शहरी इलाकों में, क्योंकि बच्चों में पहले से ही अत्यधिक प्रसार है, स्कूल खोलना, आखिरकार बहुत जोखिम भरा प्रस्ताव नहीं हो सकता है.

- इसके अलावा दूसरी लहर के दौरान, फरीदाबाद ग्रामीण क्षेत्र में 59.3% (दोनों आयु वर्ग में लगभग बराबर) सीरोप्रवलेंस है, जिसे पिछले राष्ट्रीय सर्वेक्षणों की तुलना में उच्च माना जा सकता है.

- गोरखपुर ग्रामीण में 87.9% की अत्यधिक उच्च प्रसार दर है. 2 से 18 साल आयु वर्ग में 80.6% और 18 साल से ज्यादा में 90.3% हैं. इस तरह के सीरोप्रवलेंस से उम्मीद है कि इन स्तरों को किसी भी "तीसरी लहर" संभावना कम है

- दिल्ली और यूपी दोनों में कोविड -19 मामलों में केस बढ़ने और तेज गिरावट को इन निष्कर्षों से आंशिक रूप से समझाया जा सकता है

- कुल मिलाकर, सर्वेक्षण में शामिल ग्रामीण आबादी के आधे से ज्यादा यानी 62.3% में संक्रमण के सबूत मिले है. 

- अगरतला ग्रामीण इलाकों में कम से कम सरोप्रवलेंस 51.9% था, शायद इसलिए कि इसमें कुछ आदिवासी आबादी भी शामिल थी, जिसमें आमतौर पर कम गतिशीलता होती है, जिसके परिणामस्वरूप COVID19 संक्रमण की संभावना कम होती है.

इस सीरोप्रवलेंस स्टडी के लिए अलग अलग इलाकों से लोगों को शामिल किया गया जिसमें बच्चे भी शामिल है.

- शहरी इलाके में 1001 लोगों पर स्टडी की गई, जिसमे से 748 सीरो पॉजिटिव पाए गए यानी 74.7% सीरोप्रवलेंस था. इसमें 18 साल से ज्यादा उम्र के 909 थे जिसमे से 680 सीरो पॉजिटिव पाए गए जबकि 18 साल से कम उम्र के 92 थे और 68 स्टडी में सीरो पॉजिटिव पाए गए. 

- इसी तरह ग्रामीण इलाकों 3508 लोगों पर स्टडी हुई जिसमें से 2,063 सीरो पॉजिटिव पाए गए है, यानी 58.8% सीरोप्रवलेंस था. इसमें 18 साल से ज्यादा उम्र के 2,900 थे 1,741 सीरो पॉजिटिव थे जबकि 18 साल से कम उम्र के 608 लोगों की स्टडी में 322 सीरो पॉजिटिव थे. 

- दिल्ली के शहरी इलाकों में 1001 लोगों पर स्टडी की गई है जिसमें 18 साल से कम उम्र के 92 थे जिसमें सीरो पॉजिटिव पाए गए, यानी इस आयु वर्ग में सीरो पॉजिटिविटी दर 73.9% है. इसी तरह 18 साल से ज्यादा उम्र के 909 में से 680 सीरो पॉजिटिव पाए गए यानी 74.8%.

- दिल्ली एनसीआर क्षेत्र में आनेवाले फरीदाबाद के बल्लभगढ़ ग्रामीण इलाके में 1099 लोगों पर स्टडी की गई जिसमें से 626 लोग सीरो पॉजिटिव पाए गए. इसमें 18 साल के कम उम्र के 189 थे जिसमें से 116 सीरो पॉजिटिव पाए गए यानी 61.4%. वहीं 18 साल से ज्यादा उम्र के 870 में से 512 सीरो पॉजिटिव थे यानी 58.8%. दोनो आयु वर्ग को एक साथ सीरो पॉजिटिविटी 59.3% है.

- भुवनेश्वर ग्रामीण में एक हज़ार लोगों पर ये स्टडी हुई जिसमें से 526 यानी 52.6% लोग सीरो पॉजिटिव थे. 18 साल से कम उम्र के 165 में 75 सीरो पॉजिटिव थे. जबकि 18 साल से ज्यादा उम्र के 835 में 451 सीरो  पॉजिटिव पाए गए. 

- गोरखपुर ग्रामीण इलाके में 448 लोगो को स्टडी में शामिल किया गया और इसमें से 394 सीरो पॉजिटिव पाए गए, यानी 87.9% सीरो पॉजिटिविटी मिली यहां. आयु वर्ग में देखे तो 18 साल से कम उम्र के 108 लोगों में 87 और 18 साल से ज्यादा उम्र के 340 में 307 लोग सीरो पॉजिटिव आए. यानी 18 साल से कम उम्र में सीरो पॉजिटिविटी दर 80.6% और उसे ज्यादा में 90.3% पाया गया.

- अगरतला ग्रामीण इलाके में 1001 लोगों लार ये स्टडी हुई जिसमें 520 लोग सीरो पॉजिटिव आए, यानी 51.9% है सीरो पॉजिटिविटी. 18 साल से कम उम्र के 146 बच्चों में से 45 सीरो पॉजिटिव आए. वहीं 18 साल से ज्यादा उम्र के 855 में 475 लोग सीरो पॉजिटिव आये है. 

कुल मिलाकर अलग अलग इलाकों से 4509 लोगों को स्टडी में शामिल किया गया जिसमें से 2811 सीरो पॉजिटिव पाए गए. यानी 62.3% सीरो पॉजिटिविटी दर है.

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