इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार (28 मार्च, 2025) को कहा कि सरकार ने बड़ी चुनौती बन गए साइबर हमलों से निपटने के लिए व्यापक तकनीकी और कानूनी उपाय किए हैं.
राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान वैष्णव ने बताया कि सरकार इस चुनौती से निपटने के लिए लोगों में जागरूकता भी पैदा कर रही है. पूरक प्रश्नों के जवाब में वैष्णव ने कहा, ‘साइबर हमले हमारे लिए एक बड़ी चुनौती हैं. इस चुनौती को लेकर सरकार ने नागरिकों को तैयार करने के लिए जागरूकता पैदा करने के अलावा व्यापक कानूनी और तकनीकी उपाय किए हैं’.
'संसद में डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम पारित'
उन्होंने कहा कि भारत के पास एक मजबूत साइबर सुरक्षा नीति है और इसे बहुत सावधानी से लागू किया जा रहा है और यही वजह है कि वैश्विक साइबर सुरक्षा सूचकांक में भारत की रैंकिंग 30-40 से सुधरकर अब शीर्ष 10 में आ गई है. अश्विनी वैष्णव ने कहा कि कानूनी मोर्चे पर संसद ने डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम पारित किया है और मौजूदा आईटी कानूनों में प्रावधानों को भी मजबूत किया है.
'बीएनएस में साइबर अपराधियों के लिए दंड का प्रावधान'
वैष्णव ने कहा कि इसके अलावा नए भारतीय न्याय संहिता अधिनियम में साइबर अपराधियों के लिए दंड के प्रावधान हैं. उन्होंने कहा कि तकनीकी पक्ष पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने साइबर अपराधों से प्रभावी तरीके से निपटने के लिए भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) बनाया है और इसके अच्छे परिणाम मिले हैं. उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि भारत जी-20 शिखर सम्मेलन और राम मंदिर उद्घाटन समारोह के दौरान बड़े साइबर हमलों को विफल करने में सक्षम था.
वैष्णव ने बताया कि कि ‘सीईआरटी-इन’ द्वारा दी गई और ट्रैक की गई जानकारी के अनुसार साइबर सुरक्षा घटनाओं की कुल संख्या 2023 में 15,92,917 और 2022 में 13,91,457 थीं जो बढ़कर 2024 में 20,41,360 हो गईं. वैष्णव ने कहा, ‘सरकार देश में साइबर हमलों की बढ़ती संख्या से अवगत है. साइबर सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए कई कानूनी, तकनीकी और प्रशासनिक नीतिगत उपाय किए गए हैं’.
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