UP Election 2027: लोकसभा में छिटके, अब योगी ने झटके, 20% आबादी हो जाएगी खुश! सीएम योगी के इस दांव से धुल जाएंगी सपा-कांग्रेस की उम्मीदें?
UP Election 2027: यूपी में पिछले लोकसभा चुनाव में SC सीटों पर बीजेपी का परफॉर्मेंस खराब रहा था. अब सफाई कर्मचारियों के लिए लिया गया फैसला बीजेपी को आगामी चुनाव में इन सीटों पर फायदा पहुंचा सकता है.

UP Election 2027: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रयागराज महाकुंभ संपन्न होने के बाद सफाई कर्मियों के लिए एक बड़ा ऐलान किया. उन्होंने कुंभ के दौरान सफाई का जिम्मा संभाल रहे 15 हजार कर्मचारियों को 10-10 हजार का बोनस देने का ऐलान किया. इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश के भी सभी सफाई कर्मियों को भी एक खुशखबरी दी. इनकी न्यूनतम सैलरी 16 हजार तय कर दी गई, जो इसी अप्रैल से लागू हो जाएगी. सीएम योगी के इस ऐलान के बाद कई सफाई कर्मचारियों के वीडियो सामने आ रहे हैं जो यूपी सरकार के इस फैसले से बहुत ज्यादा खुश हैं.
सफाई कर्मचारियों के लिए यह निश्चित तौर पर एक बड़ा राहतभरा फैसला है. न्यूनतम सैलरी में ये इजाफा उन्हें बढ़ती महंगाई से निपटने में काफी मदद देगा. इसके साथ ही राज्य की बीजेपी सरकार को भी यह आगामी विधानसभा चुनाव में मदद पहुंचा सकता है.
दरअसल, साल 2011 में हुई जनगणना के मुताबिक, उत्तर प्रदेश में अनुसूचित जनजाति की आबादी 20.7 फीसदी है. यही आबादी आमतौर पर सफाई या मैला ढोने का काम करती है. वैसे तो यह वोट बैंक हमेशा से बहुजन समाज पार्टी (बसपा) का रहा है लेकिन मायावती के नरम रूख से यह आबादी बीजेपी, सपा और कांग्रेस की तरफ आकर्षित हुई है. साल 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव हों या 2017 और 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव हों, इस आबादी ने बीजेपी के पक्ष में जमकर वोट किया है. हालांकि पिछले लोकसभा चुनाव में यह वोट बैंक पूरी तरह बीजेपी से छिटका हुआ दिखा.
17 SC सीटों पर 9 में हार
इंडिया गठबंधन ने बीजेपी की 400 सीट के नारे को संविधान बदलने और आरक्षण खत्म करने से जोड़ते हुए दलित वोटर्स को अपनी ओर खींचा. नतीजा यह हुआ कि यूपी में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित 17 सीटों में से बीजेपी को 9 पर हार का सामना करना पड़ा. जबकि 2014 में वह इन सभी सीटों पर जीती थी और 2019 में भी उसने इनमें से 15 सीटों पर कब्जा जमाया था. यानी साफ है कि यूपी की 20 फीसदी आबादी बीजेपी से छिटक चुकी थी.
दलित विरोधी छवि से निकलने की कोशिश
विपक्षी गठबंधन ने इसके बाद से लगातार बीजेपी सरकारों को दलित विरोधी बताने का अपना अभियान जारी रखा है. बीजेपी भी खुद को दलित विरोधी इस छवि से निकालने के लिए पुरजोर कोशिश कर रही है. सीएम योगी का हालिया फैसला भी इसी प्रयास का एक हिस्सा कहा जा सकता है. महाकुंभ के बाद सफाई कर्मियों के साथ खाना और फिर बोनस और न्यूनतम सैलरी बढ़ाने का फैसला यूपी विधानसभा चुनाव में सीएम योगी के लिए गेम चेंजर साबित हो सकता है. लोकसभा चुनाव के बाद सपा और कांग्रेस जिस तरह से यूपी से योगी सरकार की छुट्टी होने के दावे कर रही थी, वह इस फैसले के बाद निश्चित तौर पर थोड़ी टेंशन में जरूर होंगी.
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