FBI Investigation: प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने साइबर अपराध के जरिये अर्जित काले धन को सफेद बनाने वाले एक बड़े रैकेट का पर्दाफाश किया है. इस मामले में ईडी ने 20.69 करोड़ रुपये की 10 अचल संपत्तियों को जब्त किया. इनमें दिल्ली के 9 फ्लैट और हरियाणा के रेवाड़ी में एक कृषि भूमि शामिल है. ये संपत्तियां मास्टरमाइंड पुनीत माहेश्वरी और आशीष कक्कड़ के परिवार के नाम पर थीं. ईडी ने अपनी जांच साइबर फ्रॉड से संबंधित कई एफआईआर के आधार पर शुरू की थी.
शेयर बाजार से लेकर फर्जी लोन ऐप तक ठगी के तरीके
इन्वेस्टमेंट फ्रॉड: शेयर बाजार में फर्जी निवेश ऐप्स के जरिए लोगों को बड़ा फायदा दिखाकर ठगा जाता था. साथ ही टैक्स और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर भी पैसा ऐंठा जाता है.
पार्ट-टाइम जॉब फ्रॉड: सोशल मीडिया पर छोटे निवेश और जॉब के नाम पर लोगों को फंसाया जाता है.
ऑनलाइन शॉपिंग फ्रॉड: सस्ते सामान का लालच देकर कस्टम ड्यूटी और डिलीवरी चार्ज के नाम पर लोगों से पैसा लिया जाता है.
फर्जी लोन ऐप: छोटी रकम के लोन देकर ऊंची ब्याज दरें वसूलने के साथ धमकियां दी जाती थीं.
मनी लॉन्ड्रिंग का नेटवर्क
जांच में पता चला कि अपराधी छोटे देशों जैसे कुराकाओ, माल्टा और साइप्रस में रजिस्टर्ड फर्जी वेबसाइट्स का इस्तेमाल करते थे. भारत में पैसे को अलग-अलग खातों में ट्रांसफर कर छुपाया जाता और फिर विदेशों में भेजा जाता था. नकली आयात-निर्यात के जरिए इन पैसों को सफेद किया जाता था.
4,978 करोड़ रुपये का घोटाला
ईडी की जांच में खुलासा हुआ कि इन ठगों ने 4,978 करोड़ रुपये की अवैध कमाई को विदेश भेजा. फर्जी कंपनियां ड्राइवर और सफाई कर्मियों के नाम पर रजिस्टर्ड थीं. मास्टरमाइंड पुनीत माहेश्वरी और आशीष कक्कड़ को 2024 में गिरफ्तार किया गया था. छापेमारी में 27.50 किलो सोना, 75 लाख रुपये नकद और कई आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद हुए.