Seva Vikas Cooperative Bank Fraud Case: एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट (ED) ने सेवा विकास को-ऑपरेटिव बैंक फ्रॉड मामले में सागर मारुति सूर्यवंशी को गिरफ्तार किया है. ईडी ने पहले इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट के तहत मामला दर्ज किया था. ईडी के मुताबिक इस बैंक फ्रॉड में 124 लोन अकाउंट एनपीए यानी नॉन परफॉर्मिंग ऐसेट घोषित कर दिए गए थे.
सेवा विकास को-ऑपरेटिव बैंक केस तकरीबन 429 करोड रुपए के बैंक घोटाले को अंजाम दिया गया था, जिसके कारण हजारों खाताधारकों को नुकसान उठाना पड़ा. एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट ने इस मामले की जांच बैंक के एक्स चेयरमैन अमर मूलचंदानी, बैंक के डायरेक्टर्स, अधिकारियों और लोन डिफॉल्टर्स के खिलाफ पुणे में दर्ज एफआईआर के बाद शुरू की थी.
नियमों को ताक पर रखकर खोला गया था बैंक
जांच के दौरान ईडी को पता चला कि सेवा विकास कोऑपरेटिव बैंक को नियमों को ताक पर रखकर खोला गया था. बैंक के चेयरमैन अमर मूलचंदानी ने बैंक में सभी बड़े पदों पर अपने परिवार के लोगों को बैठाया हुआ था. बैंक की तरफ से दिए गए 92 फीसदी से ज्यादा लोन अकाउंट एनपीए घोषित कर दिए गए थे.
10 लोन अकाउंट के जरिए बैंक को लगाया चूना
जांच के दौरान ईडी को पता चला कि सागर सूर्यवंशी और उसके रिश्तेदारों ने अमर मूलचंदानी के साथ सांठगांठ कर 10 लोन अकाउंट के जरिए बैंक को करीब 61 करोड़ का चूना लगा दिया. ईडी ने सागर सूर्यवंशी को 10 दिन की रिमांड पर ले लिया है. साथ ही ईडी अब तक इस मामले में करीब 123 करोड़ रुपये की प्रॉपर्टी अटैच कर चुकी है.
एनफोर्समेंट डायरेक्टरेट के मुताबिक, "जांच में पता चला है कि अमर मूलचंदानी ने किसी भी विवेकपूर्ण बैंकिंग मानदंडों का पालन किए बिना बैंक को एक परिवार के स्वामित्व वाली कंपनी की तरह चलाया था."
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