नई दिल्ली: इस वक़्त भारत में 29 राज्य और 7 केंद्र प्रशासित राज्य हैं. एक राज्य है जिसका नाम है जम्मू और कश्मीर. ये सूबा पाकिस्तान की सीमा से सटा हुआ है और इसे धरती का स्वर्ग भी कहा जाता है. दिलचस्प बात ये है कि साल 2017 तक ये देश का अकेला राज्य था जिसकी दो राजधानियां थीं. जम्मू और श्रीनगर. हर साल सचिवालय और दूसरे सरकारी दफ्तरों का श्रीनगर से जम्मू और जम्मू से श्रीनगर स्थानांतरण होता है. इसे दरबार मूव के नाम से जाना जाता है.
इस राज्य की अपनी अनेक खूबियां हैं. लेकिन दो बातें उसे देश के दूसरे सूबों से अलग करती हैं. एक है अनुच्छेद 370 और दूसरा है अनुच्छेद 35ए.
जब जम्मू और कश्मीर का मुद्दा पाकिस्तान से उलझा हुआ था और मामला संयुक्त राष्ट्र में भी जा चुका था, उसी दौरान जब साल 1952 में जम्मू-कश्मीर में शेख अब्दुल्ला की सरकार थी, भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू और शेख अब्दुल्ला के बीच एक समझौता हुआ, जिसे 'दिल्ली समझौता' या दिल्ली एग्रीमेंट के नाम से जाना जाता है.
इस समझौते के तहत जम्मू-कश्मीर के लोगों को भारत की नागरिकता देने का फैसला हुआ. इस एग्रीमेंट के तहत सूबे को धारा 370 का विशेष अख्तियार दिया गया. और फिर इस एग्रीमेंट के दो साल बाद 14 मई 1954 को भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के आदेश से संविधान में अनुच्छेद 35-ए जोड़ा गया. इस अनुच्छेद के जोड़े जाने के साथ ही जम्मू-कश्मीर को कुछ विशेषाधिकार मिल गए.
आइए जानते हैं- वो विशेषाधिकार क्या हैं और जम्मू-कश्मीर भारत के दूसरे सूबों से कितना अलग है?
1. दोहरी नागरिका जम्मू-कश्मीर के नागरिकों को दोहरी नागरिकता मिली हुई है. यानि जम्मू-कश्मीर के लोग जम्मू-कश्मीर के नागरिक हैं और इसके साथ ही वो भारत के भी नागरिक हैं. यानि वो देश के किसी दूसरे राज्य में भी बस सकते हैं, जमीन खरीद सकते हैं. जबकि दूसरे राज्य के लोग भारत के नागरिक हैं, लेकिन वो जम्मू-कश्मीर के नागरिक नहीं हो सकते. वो जम्मू-कश्मीर में जमीन नहीं खरीद सकते और यहां के स्थाई नागरिक नहीं बन सकते.
2. झंडा और संविधान अलग जम्मू-कश्मीर का अपना झंडा और अपना संविधान है. देश के किसी दूसरे राज्य के पास न अपना झंडा नहीं है और न ही अपना संविधान है. जम्मू-कश्मीर ने 17 नवंबर 1956 को अपना संविधान पारित किया था.
3. इमरजेंसी नहीं लगाई जा सकती कश्मीर को जो विशेषाधिकार मिले हैं उनके तहत वहां आर्थिक इमरजेंसी नहीं लगाई जा सकती.
4. विधानसभा का कार्यकाल देश की सभी विधानसभाओं का कार्यकाल पांच साल का है, लेकिन जम्मू-कश्मीर में विधानसभा का कार्यकाल 6 साल का है.
5. वोटिंग का अधिकार जम्मू-कश्मीर में वोट का अधिकार सिर्फ वहां के स्थाई नागरिकों को है. किसी दूसरे राज्य के लोग यहां वोट नहीं दे सकते. चुनाव में उम्मीदवार नहीं बन सकते.
