नई दिल्ली: दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने लाल किले पर CISF जवानों पर हमला करने वाले आकाश प्रीत सिंह नाम के एक शख्स को गिरफ्तार किया है. आकाश पर आरोप है कि 26 जनवरी के दिन उसने तलवार से CISF जवानों पर हमला किया था. हमले के दौरान आकाश प्रीत खुद भी घायल हुआ था. पुलिस के मुताबिक आकाश प्रीत के हमले में कई जवान घायल हुए थे. क्राइम ब्रांच की टीम उसकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही थी. उसे नॉर्थ दिल्ली इलाके से गिरफ्तार किया गया है. पुलिस अब तक 122 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है और 44 FIR दर्ज कर चुकी है.
क्राइम ब्रांच के मुताबिक पब्लिक द्वारा अभी तक 5000 से ज्यादा वीडियो और फ़ोटो दंगों के दौरान की पुलिस को मिली है. जिनका विश्लेषण किया जा रहा है और आरोपियों की पहचान की जा रही है. इन तमाम फुटेज से आरोपियों के चेहरे निकालने के लिए यानी उनकी पहचान के लिए नेशनल फॉरेंसिक लैब, गुजरात से 2 टीम दिल्ली पहुँच चुकी है. इनका काम वीडियो एनालिसिस करना है. ये टीमें उन वीडियो में से फ़ोटो बनाएगी, फिर दिल्ली पुलिस उन्हें फेस रिगनिशन सिस्टम (face recognition system) में डाल कर देखा जाएगा कि ये कोई क्रिमिनल (या फिर खालिस्तानी ग्रुप से जुड़ा व्यक्ति) तो नहीं था. अगर क्रिमिनल निकला तो उसका अलग से ट्रीटमेंट होगा यानी कड़ी धारा लगाई जाएगी और जो किसान शामिल हुए उन पर भी कार्रवाई होगी.
किसान जिन रास्तों से होते हुए लाल किले और आईटीओ पर पहुंचे थे उन रास्तों पर लगे तमाम सीसीटीवी फुटेज को इकट्ठा करने का काम किया जा रहा है. इसके अलावा वीडियो फुटेज में और सीसीटीवी फुटेज में जिन ट्रैक्टर्स के नंबर साफ नजर आ रहे हैं, उनके एड्रेस लाइसेंस अथॉरिटी से लेकर उन सभी को नोटिस भेजा जा रहा है.
मोबाइल फॉरेंसिक टीम जहां हिंसा हुई वहां का दौरा कर चुकी हैं, जिनमें गाजीपुर, नांगलोई, NH10, नजफगढ़-नांगलोई रोड और लालकिला शामिल हैं. वहां से टायर मार्क के सैंपल उठाये जा रहे हैं. सरकारी संपत्ति और लालकिले में की गई टूट-फुट की फोटोग्राफी करना, फिंगर प्रिंट इकट्ठा करने आदि का काम चल रहा है. आज भी टीम कई अन्य जगह पर जाएगी जहां हिंसा हुई।
उपद्रव में शामिल लोगों की गिरफ्तारी से पहले पुलिस उनकी लोकेशन पुख्ता कर लेना चाहती है, ताकि कोई निर्दोष न पकड़ा जाए. जिसके लिए घटना के वक़्त मोबाइल लोकेशन, किसी वीडियो में उसका फ़ोटो, किस वाहन से वो घटनास्थल पर गया, वो कहाँ का रहने वाला है, कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड तो नहीं है.
हर मौके का जहां उपद्रव हुआ वहां पर जो मोबाइल एक्टिव थे, उनका डंप डेटा ले रहे हैं, जिसको लेकर मोबाइल एक्सपर्ट की टीम भी दिल्ली पुलिस ने हायर की है. हजारों नंबर की डिटेल है. उनमें से वो नंबर निकाले जा रहे हैं, जो पहली बार घटनास्थल पर गए, वही सस्पेक्ट हैं. उनको बुलाकर पूछताछ होगी.
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