पूर्व जिला और सत्र न्यायाधीश ने उठाए सवाल, अयोध्या केस की रोज सुनवाई हो सकती है तो दुष्कर्म केस की क्यों नहीं?
रेनू शर्मा ने कहा कि यदि अयोध्या केस के मामले की रोज सुनवाई अदालत कर सकती है तो दुष्कर्म के मामलों की सुनवाई ऐसी प्राथमिकता से क्यों नहीं हो सकती.

भोपाल: मध्यप्रदेश में पिछले दो सालों में 26 दुष्कर्म के आरोपियों को फांसी की सजा सुनायी गयी है. लेकिन अभी तक किसी भी दोषी को फांसी के तख्ते पर नहीं लटकाया गया है. भोपाल की जिला अदालत की पूर्व जिला और सत्र न्यायाधीश रेनू शर्मा ने कहा कि जब तब दुष्कर्म के मामलों की समय सीमा में सुनवाई नहीं होगी तब तक ये होता रहेगा.
रेनू शर्मा ने कहा कि यदि अयोध्या केस के मामले की रोज सुनवाई अदालत कर सकती है तो दुष्कर्म के मामलों की सुनवाई ऐसी प्राथमिकता से क्यों नहीं हो सकती. साथ ही दुष्कर्म के दोषी को यदि फांसी की सजा सुनायी जाती है तो उसे फिर दया याचिका की सहूलियत नहीं मिलनी चाहिए. पुलिस मामले की जांच करती है. कोर्ट दोषी को सजा भी सुना देती है. मगर लोवर कोर्ट के फैसलों को बड़ी अदालत में लटका कर रख दिया जाता है.
पूर्व जिला जज रेनू शर्मा ने 2006 में बलात्कार और हत्या के आरोपी को फांसी की सजा सुनायी थी. मगर उसे आज तक फांसी नही दी गयी. उन्होंने कहा कि रेप के मामलों में पुलिस जांच अच्छे से करे. मेडिकल एविडेंस अच्छे से जुटाए. गवाहों के बयान एक महीने में कराये तो अदालत को सजा सुनने में सहूलियत होती है.गौरतलब है कि हाल ही में हुई हैदराबाद गैंगरेप मामले के बाद पूरा देश गुस्से में है. दोषियों को फांसी की सजा देने की मांग हो रही है. वहीं अभी तक निर्भया केस के आरोपियों को अभी तक फांसी नहीं दी गई है. ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि कोर्ट की धीमी प्रकिया से दोषियों के हौसले बुलंद होते जा रहे हैं.
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