सोमनाथ मंदिर के पास उर्स की इजाजत से सुप्रीम कोर्ट ने मना किया, दरगाह ने सदियों पुरानी परंपरा बताया था
एसजी तुषार मेहता ने कहा कि भूमि पर हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों समेत किसी भी गतिविधि की अनुमति नहीं दी जा रही, जिसपर पहले अतिक्रमण था.
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गुजरात के गिर-सोमनाथ क्षेत्र में उर्स की मांग सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (31 जनवरी, 2025) को ठुकरा दी है. हाजी मंगरौली शाह दरगाह के मैनेजमेंट का कहना था कि वहां सदियों से उर्स हो रहा है, लेकिन गुजरात सरकार ने बताया कि सरकारी जमीन पर अवैध तरीके से बने मंदिर-मस्जिद जैसे कई निर्माण को उस क्षेत्र से हटाया जा चुका है. दरगाह ने तीन फरवरी तक उर्स आयोजित करने की अनुमति मांगी थी.
प्रसिद्ध सोमनाथ मंदिर के आस-पास के क्षेत्र में गिर-सोमनाथ जिला प्रशासन ने सरकारी भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की थी. सितंबर में सभी कथित अवैध ढांचों को हटा दिया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने भी इस पर रोक लगाने से मना कर दिया था. मुख्य मामला अभी भी हाई कोर्ट में लंबित है.
हाजी मंगरौली शाह दरगाह के प्रबंधकों ने 1 से 3 फरवरी के बीच उर्स की इजाजत मांगते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था. जस्टिस भूषण रामाकृष्ण गवई की अध्यक्षता वाली बेंच के सामने गुजरात सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए. उन्होंने बताया कि सोमनाथ के पास सरकारी भूमि पर अब कोई दरगाह नहीं है. जमीन सरकार के कब्जे में है. उस पर किसी गतिविधि की इजाजत नहीं दी जा सकती.
एसजी तुषार मेहता ने कहा कि उक्त भूमि पर हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों समेत किसी भी गतिविधि की अनुमति नहीं दी जा रही, जिसपर पहले अतिक्रमण था. आवेदक की ओर से उपस्थित वकील ने कहा कि वहां एक दरगाह थी, जिसे प्राधिकारियों ने ध्वस्त कर दिया. उन्होंने कहा कि दरगाह पर उर्स उत्सव मनाने की परंपरा पिछले कई वर्षों से जारी है और अधिकारियों ने गुरुवार को इसके लिए अनुमति देने से इनकार कर दिया.
पीठ ने कहा कि मुख्य मामले को सुने बिना आवेदन में किए गए अनुरोध को स्वीकार नहीं किया जा सकता. सुप्रीम कोर्ट ने 27 जनवरी को कहा था कि वह गिर सोमनाथ जिले में बिना पूर्व अनुमति के आवासीय और धार्मिक संरचनाओं को कथित रूप से ध्वस्त करने के लिए गुजरात के अधिकारियों के खिलाफ अवमानना याचिका समेत विभिन्न याचिकाओं पर तीन सप्ताह बाद सुनवाई करेगा.
(निपुण सहगल का इनपुट)
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