साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ब्रांडिंग 'चायवाला' शब्द का इस्तेमाल करके की थी. बीजेपी को इसका फायदा भी मिला. अब हिमाचल प्रदेश में भी बीजेपी को एक चायवाला मिल गया है जिसकी चर्चा खूब हो रही है. लेकिन ये शख्स आम चायवाले से बिलकुल अलग है और पार्टी की ओर से इसे विधानसभा चुनाव का टिकट भी दिया गया है. लेकिन ये शख्स सामान्य चायवाले की तरह नहीं है.
दरअसल हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इस चुनाव से पहले बीजेपी के एक उम्मीदवार की खूब चर्चा हो रही है. राजधानी शिमला में बीजेपी ने एक 'चायवाले' को टिकट दे दिया है. इस 'चायवाला' प्रत्याशी यानी संजय सूद के पास करोड़ों की संपत्ति है.
पार्टी के इस कदम ने शिमला विधानसभा सीट पर होने वाले मुकाबले को रोचक बना दिया है. इस नाम की चर्चा इसलिए भी हो रही है क्योंकि देश में 'चायवाला' उपनाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी मिल चुका है.
करोड़ों की है संपत्ति
टी शॉप ओनर होने के कारण संजय सूद को लोग चायवाला बुलाते हैं लेकिन वह करोड़ों की संपत्ति के मालिक है. संजय सूद के चुनावी हलफनामे के अनुसार उनकी और उनकी पत्नी की के पास कुल 2.7 करोड़ की संपत्ति है. संजय सूद के पास 1.45 करोड़ की अचल और 54 लाख रुपये की चल संपत्ति है. वहीं उनकी पत्नी के सुनीता सूद के पास 46 लाख रुपये की चल और 25 लाख रुपये की अचल संपत्ति है.
संजय सूद ने जिस सीट से पर्चा दाखिल किया है उसी सीट पर बीजेपी मंत्री सुरेश भारद्वाज की पिछले चार बार से चुनाव लड़ चुके हैं. कसुंपटी से टिकट मिलने के बाद सूद ने कहा, "मैं बहुत आभारी हूं कि भाजपा ने मुझे शिमला अर्बन जैसी हॉट सीट से चुनाव लड़ने के लिए अपना उम्मीदवार बनाया. मेरा विश्वास सातवें आसमान पर है क्योंकि यह मेरे जैसे छोटे कार्यकर्ता के लिए एक बड़ा सम्मान है. "
कौन है शिमला का 'चायवाला' प्रत्याशी
TOI की एक रिपोर्ट के मुताबिक संजय सूद ने अपने बारे में बताते हुए कहा, 'जैसा कि कहावत है- लोग आपके संघर्ष को नहीं बल्कि सफलता को देखते हैं. मैंने भी इस मुकाम तक पहुंचने के लिए बहुत मेहनत की है. उन्होंने बताया कि वह एक बहुत ही गरीब परिवार से हैं. उन्होंने साल 1991 में शिमला में चाय की दुकान की शुरुआत की थी. इससे पहले वह कॉलेज की फीस भरने के लिए अखबार बेचने का काम करते थें."
अपनी संपत्ति के बारे में उन्होंने बताया कि उन्होंने समय के साथ काफी बचत की है. उन्होंने कहा, मैंने जब प्रॉपर्टी खरीदी थी तब उसकी इतनी कीमत ज्यादा नहीं थी. इसके अलावा मैं हर रोज पोस्टल सेविंग में 100 रुपये जमा करता था. हालांकि गरीब परिवार से होने के बावजूद मेरे दिल में सेवा की भावना थी.
संजय सूद ने कहा कि पांच साल तक उन्होंने छात्र परिषद में काम किया. लेकिन आर्थिक तंगी के कारण इसे रोकना पड़ा. उन्होंने बताया कि इसके बाद उन्होंने दो सालों तक चिकित्सा प्रतिनिधि के रूप में काम किया, जिसके बाद 1991 में इस चाय की दुकान खोली थी.
राजनीतिक पृष्ठभूमि से नहीं आते सूद
संजय सूद किसी राजनीतिक पृष्ठभूमि से नहीं आते, लेकिन हमेशा से ही जनता की सेवा करना चाहते थें. यही कारण है कि साल 1980 में बीजेपी के गठन के बाद से वह लगातार पार्टी के लिए काम कर रहे हैं."
पीएम मोदी से की जा रही है तुलना
'चायवाला' इस नाम का ताल्लुक पीएम मोदी से भी है इसलिए संजय सूद की तुलना पीएम मोदी से की जा रही है. इसपर सूद ने कहा कृपया मेरे साथ उनकी तुलना न करें, वह एक अतुलनीय व्यक्तित्व हैं, मैं उनके पैरों के नीचे की धूल के बराबर भी नहीं हूं."
12 नवंबर को एक चरण में मतदान
हिमाचल प्रदेश की चुनावी तिथियों का एलान कर दिया गया है. यहां 12 नवंबर को एक चरण में वोटिंग होगी. इसके लिए 17 अक्टूबर को अधिसूचना जारी की जाएगी. वहीं मतगणना आठ दिसंबर को होगी. चुनाव आयोग के अनुसार प्रदेश में 55 लाख 07 हजार 261 मतदाता हैं. जिसमें से इनमें 27 लाख 80 हजार 208 पुरुष और 27 लाख 27 हजार 16 महिला वोटर्स हैं.
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