Ashwini Vaishnaw In Rajya Sabha: केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnaw) ने शुक्रवार को राज्यसभा (Rajya Sabha) को बताया कि अग्निपथ योजना (Agnipath Scheme) के खिलाफ आंदोलन में भारतीय रेलवे (Indian Railways) को 259.44 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है. कांग्रेस नेता अखिलेश प्रसाद सिंह (Akhilesh Prasad Singh) के पूछे गए सवालों का लिखित जवाब देते हुए मंत्री ने कहा, आंदोलन के परिणामस्वरूप सार्वजनिक अव्यवस्था के चलते रेल सेवाओं के बाधित होने के चलते यात्रियों को दी गई धनवापसी की राशि के बारे में एक अलग डेटा मौजूद नहीं हैं. हालांकि अश्विणी वैष्णव ने कहा कि 14 जून 2022 से 30 जून 2022 के दौरान ट्रेनों के रद्द होने के चलते 102.96 करोड़ रुपये का कुल रिफंड दिया गया था.


मंत्री का जवाब तब आया है, जब कांग्रेस सांसद ने पूछा, क्या यह सच है कि अग्निपथ योजना के खिलाफ आंदोलन के कारण रेलवे संपत्ति का व्यापक नुकसान हुआ है? मंत्री ने यह भी कहा कि भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची के तहत पुलिस और सार्वजनिक व्यवस्था राज्य के विषय हैं. वैष्णव ने कहा राज्य सरकारें अपनी कानून प्रवर्तन एजेंसियों के माध्यम से रेलवे पर अपराध की रोकथाम, उपद्रवियों का पता लगाने, इसकी जांच और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिम्मेदार हैं.


रेलवे स्टेशन को बना दिया गया युद्ध का मैदान


उन्होंने कहा कि ट्रेनों में आग लग गई और सार्वजनिक और निजी वाहनों पर हमला किया गया, जबकि कई राज्यों में रेलवे स्टेशनों और राजमार्गों को रक्षा भर्ती योजना, अग्निपथ के खिलाफ बढ़ते विरोध के बीच युद्ध के मैदान में बदल दिया गया. 'अग्निपथ' योजना की शुरुआत के मौके पर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने पिछले महीने कहा था कि यह एक परिवर्तनकारी पहल है, जो सशस्त्र बलों को एक युवा प्रोफाइल प्रदान करेगी. 'अग्निपथ' सैनिकों, वायुसैनिकों और नौसैनिकों के नामांकन के लिए एक अखिल भारतीय योग्यता-आधारित भर्ती योजना है. 


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अग्निपथ से मिलेंगे ये अवसर


यह योजना युवाओं को सशस्त्र बलों के नियमित कैडर में सेवा करने का अवसर प्रदान करती है. अग्निपथ योजना के तहत भर्ती होने वाले सभी लोगों को 'अग्निवीर' कहा जाएगा. 'अग्निवीरों' को प्रशिक्षण अवधि समेत 4 वर्ष की सेवा अवधि के लिए रखा जाएगा. चार सालों के बाद, योग्यता, इच्छा और चिकित्सा फिटनेस के आधार पर केवल 25 प्रतिशत अग्निवीरों को नियमित किया जाएगा. इसके बाद वे अगले 15 साल के पूरे कार्यकाल के लिए काम करेंगे. अन्य 75 प्रतिशत 'अग्निवीर' को उनके दूसरे करियर में मदद के लिए उनके मासिक योगदान के साथ-साथ कौशल प्रमाण पत्र और बैंक ऋण के रूप में आंशिक रूप से वित्त पोषित 11-12 लाख रुपये की 'सेवा निधि' दी जाएगी.


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