जम्मू: जम्मू-कश्मीर के केंद्र शासित प्रदेश बनते ही हाल ही में प्रशासन ने छुट्टियों का नया कैलेंडर जारी किया. इस कैलेंडर में जहां जम्मू-कश्मीर के भारत के साथ विलय वाले दिन छुट्टी का ऐलान किया गया, वहीं राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की जयंती वाले दिन मिलने वाली छुट्टी को रद्द कर दिया गया है. हाल ही में जारी इस कैलेंडर को लेकर अब सियासी बवाल शुरू हो गया है. जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की जयंती पर छुट्टी को रद्द किए जाने के फैसले की समीक्षा की मांग की जा रही है. नेशनल कांफ्रेंस का कहना है कि पार्टी संस्थापक शेख मोहम्मद अब्दुल्ला के योगदान को कम करके नहीं आंका जा सकता.
पार्टी का कहना है कि शेख अब्दुल्ला एक दूरदर्शी नेता थे और उन्होंने मोहम्मद अली जिन्ना के दो राष्ट्रों के फार्मूले को पूरी तरह से नकार दिया था. हालांकि नेशनल कांफ्रेंस ने यह भी कहा है कि उनके जन्मदिन पर छुट्टी देने या नहीं देने से उनके व्यक्तित्व पर कोई असर नहीं पड़ेगा. वही पैंथर्स पार्टी के मुख्य संरक्षक प्रोफेसर भीम सिंह ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को ज्ञापन भेजकर आग्रह किया है कि सरकारी कैलेंडर को वापस लिया जाए. उधर, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी की प्रदेश इकाई ने भी शहीदी दिवस और पूर्व मुख्यमंत्री शेख मोहम्मद अब्दुल्ला के जन्मदिन की छुट्टी रद्द करने के फैसले को गलत बताया है. पार्टी ने कहा है कि इससे प्रशासन लोगों से दूर हो जाएगा.
गौरतलब है कि एक महत्वपूर्ण निर्णय में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में अब अक्टूबर 26 को विलय दिवस की छुट्टी का ऐलान कर दिया गया है जबकि 13 जुलाई को शहीदी दिवस और 5 दिसंबर को शेख मोहम्मद अब्दुल्ला की जयंती पर मिलने वाली छुट्टी को रद्द कर दिया गया है. जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने हाल ही में साल 2020 के लिए सरकारी छुट्टियों का नया कैलेंडर जारी किया है जिसमें यह कुछ बदलाव किए गए हैं.
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