नई दिल्ली: कर्नाटक सरकार ने लिंगायत समुदाय के लिए अल्पसंख्यक दर्जा घोषित कर दिया. इस बाबत कर्नाटक सरकार ने शुक्रवार को एक नोटिफिकेशन भी ज़ारी किया कि लिंगायत समुदाय को अल्पसंख्यक श्रेणी में रखने की घोषणा की है. हालांकि, इस पूरे मसले पर नोटिफिकेशन जारी कर ये काम अब केंद्र को सौंप दिया है. अभी केंद्र सरकार ने लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा नहीं दिया है और राज्य अब केंद्र के फैसला का इंतजार कर रहा है.


मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की अध्यक्षता में शुक्रवार को हुई कैबिनेट मीटिंग में यह फैसला लिया गया. इससे पहले राज्य सरकार ने लिंगायत समुदाय के लोगों को अलग धर्म का दर्जा देने के सुझाव को मंजूरी दी थी. सरकार के इस फैसले पर अखिल भारतीय वीरशैव महासभा ने कांग्रेस पर जमकर हमला बोला.


शुक्रवार को दोपहर हुई बैठक में महासभा ने कहा कि कांग्रेस दोनों समुदायों (लिंगायत और वीरशैव) को अलग कर रही है. दोनों एक ही हैं यह न बोलकर सरकार इधर-उधर की बातें कर रही है. साफ है कि सरकार ने जल्द होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर ये फैसला लिया है.


सिद्दारमैया के मास्टर स्ट्रोक ने बढ़ाई बीजेपी की मुश्किलें


बता दें कि राज्य की कुल आबादी में 17 फीसदी के हिस्सेदार लिंगायत समुदाय के लोग यहां की अगड़ी जाति में आते हैं. कहा जा रहा है कि कांग्रेस सरकार की ओर से यह फैसला बीजेपी को कमजोर करने के लिए लिया गया है. भारतीय जनता पार्टी ने सिद्धारमैया सरकार के इस फैसले की निंदा की और इसे हिंदुओं को बांटने वाला करार दिया था. वहीं सिद्दारमैया के इस मास्टर स्ट्रोक ने बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. यही कारण है कि बीजेपी इस वक़्त न इनकार कर सकती है और न मंजूरी.


उधर इस मुद्दे पर खुद कांग्रेस कटघरे में खड़ी है. लिंगायत समुदाय के मुद्दे पर केंद्र की बीजेपी इसे यह कहकर टालते दिख रही है कि कर्नाटक के सीएम मनमोहन सिंह सरकार के फैसले को बदलना चाहते हैं क्योंकि यूपीए सरकार ने उस वक़्त इसकी मंजूरी नहीं दी थी. ऐसे में बीजेपी इस पर कांग्रेस को जमकर घेर रही हैं.