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जानिए, PNB घोटाले का पूरा कच्चा चिट्ठा- मनमोहन के दौर में आग़ाज़, मोदी के दौर में फला फूला

देश के दूसरे सबसे बड़े बैंक PNB के सबसे बड़े घोटाले में सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष अपना पल्ला झाड़ रही है, लेकिन सच ये है कि ये घोटाला पूर्व पीएम मननोहन सिंह के दौर में शुरू हुआ और पीएम नरेंद्र मोदी के दौर में खूब फला फूला.

नई दिल्ली: देश के दूसरे सबसे बड़े बैंक PNB के सबसे बड़े घोटाले में सत्ताधारी पार्टी और विपक्ष अपना पल्ला झाड़ रही है, लेकिन सच ये है कि ये घोटाला पूर्व पीएम मननोहन सिंह के दौर में शुरू हुआ और पीएम नरेंद्र मोदी के दौर में खूब फला फूला. इस कड़ी में ABP न्यूज ने एक और बड़ा खुलासा किया है.

ABP न्यूज़ ने अपनी पड़ताल में पाया है कि घोटाले की शुरुआत मनमोहन सिंह के दौर में साल 2010 में हुई. 2010 से लोन लेने की शुरुआत हुई और लोन के पैसों से कच्चा हीरा ही नहीं खरीदा गया बल्कि उससे ही बैंक के पुराने लोन चुकाए जाते रहे और लगातार नए लोन लेने का सिलसिला मोदी सरकार के दौर में खूब फला फूला.

ABP न्यूज़ ने अपनी पड़ताल में ये भी पाया कि 11 हजार 500 करोड़ के मामा-भांजे के महाघोटाले में बड़ा हिस्सा मामा मेहुल चोकसी का है, जबकि छोटा हिस्सा भांजा नीरव मोदी का है.

ओम प्रकाश तिलवारी पूरे घोटाले का कच्चा चिट्ठा बता रहे हैं.

सवाल: नीरव मोदी और मेहुल चोकसी की घोटाले में कितनी-कितनी हिस्सेदारी?

ओम प्रकाश तिवारी: इस घोटाले में मेहुल चोकसी की हिस्सेदारी ज्यादा है. 11,500 करोड़ के घोटाले में 6000 करोड़ से ज्यादा का हिस्सा मेहुल चोकसी का  है और नीरव मोदी का हिस्सा 4800 करोड़ का है.

सवाल: एलओयू लेटर ऑफ अंडरटेकिंग कब-कब जारी हुए यानी गोरखधंधा कब से शुरू हुआ?

ओम प्रकाश तिवारी: ये गोरखधंधा 2010 से शुरू हो गया था. 2010 के कुछ एलओयू सामने आए हैं. हालांकि अभी तक पीएनबी नें जांच एजेंसियों को सबूत नहीं दिए हैं. इससे पहले ये खबर आई थी कि 2011 से ये घोटाला चल रहा था, लेकिन अब पता चला है कि 2011 नहीं बल्कि 2010 से ही ये घोटाला चल रहा था.

सवाल: बैंकों से जो पैसा लिया गया उसका इस्तेमाल कहां-कहां किया गया?

ओम प्रकाश तिवारी: बैंको से जो पैसा लिया गया था उसे ट्रेड में नहीं इस्तेमाल किया गया. पहले खबर आई थी कि कच्चा माल खरीदने के लिए ये पैसे लिए गए थे लेकिन अब पता चला है कि घोटाले का ये पैसा ट्रेड में इस्तेमाल हुआ ही नहीं. पुराने बैंक लोन चुकाने के लिए इस पैसे का इस्तेमाल किया गया था. यानि कि बैंक के पैसे से ही बैंक के लोन चुकाए गए. कुछ पैसों को अलग धंधे में भी लगाया गया था.

सवाल: घोटाले के इन पैसों का फिर क्या किया?

ओम प्रकाश तिवारी: घोटाले के पैसे को ट्रेड में इस्तेमाल करने के बजाय बैंक का पुराना लोन चुकाने में इस्तेमाल किया गया था. बैंक के पैसे से ही बैंक के लोन चुकाए गए.

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