नई दिल्ली: कल लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण की चर्चा का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महिला सशक्तिकरण के मुद्दे पर कांग्रेस पर जमकर हमला बोला. इस दौरान पीएम मोदी ने आपके चैनल एबीपी न्यूज़ के शो ‘प्रधानमंत्री’ का जिक्र किया. पीएम मोदी ने 'प्रधानमंत्री' में राजीव गांधी के कार्यकाल में हुए शाहबानो केस वाले एपिसोड का जिक्र करते हुए कहा कि कांग्रेस नेताओं ने मुस्लिमों को गटर में रहने देने की बात कही थी.


पीएम मोदी ने कल क्या कहा?


तीन तलाक के मुद्दे पर कल संसद में पीएम मोदी ने कहा, ''35 साल बाद फिर शाह बानों के मामले में कांग्रेस को फिर अवसर मिला है, लेकिन ऊंचाई ने नीचे की चीजें देखने से मना कर दिया. आज 35 साल बाद फिर एक बार कांग्रेस के पास मौका आया है, हम बिल लेकर आए है, हम इस देश की नारी के गौरव के लिए बिल लेकर आए हैं. जब शाह बानों का मामला चल रहा था उस समय के एक मंत्री ने टीवी इंटरव्यू में एक चौंकाने वाली बात कही. उन्होंने कहा कि मुसलमानों के उत्थान की जिम्मेदारी कांग्रेस की नहीं है. अगर वो गटर में रहना चाहते हैं तो रहें.'' इस पर कांग्रेस नेताओं ने हंगामा शुरू कर दिया और नेता का नाम पूछने लगे, इस पीएम ने कहा कि यूट्यूब का लिंक भेज देंगे.


संसद में पीएम मोदी जिनका जिक्र कर रहे थे वो कौन हैं?


पीएम मोदी ने कल तीन तलाक के मुद्दे पर जिन पूर्व मंत्री का जिक्र किया उनका नाम आरिफ मोहम्मद खान है. एबीपी न्यूज के कार्यक्रम ‘प्रधानमंत्री’ में आरिफ मोहम्मद खान ने तीन तलाक के मुद्दे पर राजीव गांधी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए थे.


गटरवाला बयान नरसिम्हा राव का था- आरिफ मोहम्मद खान


कल फिर से चर्चा गर्म होने के बाद आरिफ मोहम्मद खान ने पीएम मोदी के बयान की पुष्टि की और कांग्रेस पर लगाए अपने आरोपों को दोहराया, जिसमें कांग्रेस के एक नेता ने तीन तलाक के मुद्दे पर उनसे मुसलमानों के गटर में रहने वाली बात कही थी. आरिफ मोहम्मद खान ने कहा कि ये बयान प्रधानमंत्री दिवंगत पी वी नरसिम्हा राव ने दिया था. पीवी नरसिम्हा राव राजीव गांधी सरकार में गृहमंत्री और विदेश मंत्री का पद संभाल चुके हैं.



आखिर क्या था शाह बानो केस?


साल 1978 में इंदौर की मुस्लिम महिला शाहबानों को उसके पति ने तीन तलाक दे दिया. शाहबानों के सामने पांच बच्चों समेत उनके भविष्य की गुजर बसर की चिंता थी. शाहबानों ने अदालत की शरण ली और न्यायिक मजिस्ट्रेट से लेकर हाई कोर्ट तक ने इस मांग को जायज मानते हुए फैसला शाह बानो के पक्ष में दिया.


शाह बानो मामले में संविधान और मुस्लिम पर्सनल कानून के बीच टकराव के चलते सुप्रीम कोर्ट ने मामले को पांच जजों की संविधान पीठ के हवाले कर दिया. चीफ जस्टिस वाईवी चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने 23 अप्रैल 1985 को फैसला शाह बानो के पक्ष में सुनाया.


राजीव गांधी सरकार ने अदालत के फैसले को पलट दिया था


तत्कालीन गृहराज्य मंत्री आरिफ मोहम्मद खान ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पक्ष में संसद में 55 मिनट तक भाषण दिया. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद तत्कालीन कांग्रेस सरकार को मुस्लिम वोट बैंक खिसकने का डर पैदा हो गया और राजीव गांधी सरकार ने अदालत के फैसले को पलट दिया. जिसके बाद से अरूण नेहरू और नरसिम्हा राव आरिफ मोहम्मद खान को मनाने गए थे, आरिफ मोहम्मद खान के मुताबिक, इसी दौरान नरसिम्हा राव ने  कहा कि तुम इतनी जिद्द क्यों करते हो. हम समाज सुधारक नहीं हैं. अगर मुसलमान गटर में रहना चाहते हैं तो उन्हें वहीं रहने दो.


इस फैसले ने राजीव गांधी की नई सोच और प्रगतिशील विचारों वाली छवि को नुकसान पहुंचाया और आज भी कांग्रेस शाहबानो केस से महिला सशक्तिरण के मुद्दे पर बैकफुट पर नजर आती है, जिसका पीएम मोदी भी कई मौकों पर जिक्र कर चुके हैं.


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