यादें: कॉलेज के दोस्त ने सुनाई कहानी- जब 40 छात्रों को लेकर मेस में खाना बनाने पहुंच गए थे पर्रिकर
गोवा के मुख्यमंत्री और देश के पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर का रविवार देर शाम निधन हो गया. 63 साल के सीएम पिछले करीब एक साल से कैंसर से जूझ रहे थे.

नई दिल्ली: गोवा के सीएम और पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर अब नहीं रहे. मनोहर पर्रिकर की उम्र 63 साल थी, कल शाम करीब सात बजे उन्होंने अंतिम सासें लीं. वे लंबे वक्त से कैंसर से लड़ाई लड़ रहे थे, पर्रिकर के निधन पर बीजेपी सहित पूरे देश में शोक की लहर है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित बीजेपी के सभी नेताओं ने दुख व्यक्त किया है, वहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने भी शोक व्यक्त किया है.
मुख्यमंत्री के तौर पर अंतिम क्षण तक देश की सेवा में जुटे रहे मनोहर पर्रिकर ने गोवा के पणजी में आखिरी सांस ली. चार बार गोवा के सीएम रहे पर्रिकर फरवरी 2018 से ही अग्नाशय के कैंसर से जूझ रहे थे. गोवा में 7 दिन का शोक घोषित किया गया है. आज केंद्रीय कैबिनेट की बैठक भी बुलाई गई है, शाम 5 बजे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा.
पर्रिकर के जाने के बाद उनके जानने वाले उन्हें याद कर रहे हैं. मनोहर परिकर जी के कॉलेज के दिनों के साथी बकुल देसाई ने भी पर्रिकर के निधन पर उन्हें श्रद्धांजलि दी है. इसके साथ ही उन्होंने बताया कि पर्रिकर कॉलेज के दिनों में भी एकदम सादे और सरल इंसान थे. कॉलेज के दिनों की याद ताजा करते हुए उन्होंने बताया कि पर्रिकर शर्ट पहनते थे, कंघी नही करते थे और चप्पल पहनते थे.
बकुल देसाई ने कॉलेज के दिनों की कहानी भी सुनाई. उन्होंने कहा कि पर्रिकर हॉस्टल के मेस सेकेट्री थे और उन्होंने मेस के बिल कम करने का चेलेंज लिया. एक बार मेस की स्ट्राइक हुई पर्रिकर 40 छात्रों को लेकर खाना बनाने पहुच गए. लोगों को मदद करते थे विपक्षी को सम्मान की भावना से देखते थे.
उन्होंने बताया कि मैं करीबी था पर नियम तोड़ू तो मुझे ही फाइन कर देते थे खुद पे भी फाइन लगा लेते थे. IIT में सम्मान के लिए बुलाया तो झुक कर गुरु के पैर छुए. इसके बाज करीब पांच मिनट तक तालियां बजती रहीं. बिहार: 17-17-6 के फॉर्मूले पर कैसे बीजेपी-जेडीयू-एलजेपी में सीटों की अदला-बदली हुई, पढ़ें पूरी लिस्ट बिहार: नवादा सीट नहीं बचा पाए गिरिराज लेकिन बेगूसराय से चुनाव लड़ने के आसार, शाहनवाज को टिकट मिलना मुश्किल यह भी देखें
ट्रेंडिंग न्यूज
टॉप हेडलाइंस
