एंटीलिया केस: मनसुख हिरेन की मौत के मामले की जांच अब NIA करेगी, गृह मंत्रालय ने दिया आदेश
मनसुख हिरेन की मौत के मामले की जांच अभी तक एटीएस द्वारा की जा रही थी. जिसकी निगरानी मुख्य अतिरिक्त महानिदेशक जय जीत सिंह और उप महानिरीक्षक शिवदीप लांडे कर रहे थे. हिरेन की डेड बॉडी गायब होने के एक दिन बाद 5 मार्च को मिली थी.
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मुंबई: एंटीलिया केस में काली एसयूवी के मालिक मनसुख हिरेन की मौत की जांच अब केंद्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) करेगी. इस संबंध में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने आदेश जारी कर दिया है. हिरेन का शव ठाणे में एक क्रीक में पाया गया था. 3 मार्च को एनआईए ने मुंबई में मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के बाहर 20 जिलेटिन की छड़ें और एक धमकी भरे नोट के साथ पाए गए एसयूवी की जांच पहले ही अपने हाथ में ले ली है. यह घटना 25 फरवरी की है.
आतंकवाद-रोधी जांच एजेंसी ने 13 मार्च को मुंबई के पुलिस अधिकारी सचिन वाजे को गिरफ्तार किया था. उन्हें 25 मार्च तक एनआईए की हिरासत में भेज दिया गया है. दोनों मामलों के तार एक दूसरे से जुड़े हुए हैं. एनआईए ने काले रंग के मर्सिडीज बेंज को भी जब्त कर लिया, जिसका इस्तेमाल वाजे ने किया था. मर्सिडीज के अलावा, एनआईए ने 5 लाख रुपये नकद, एक करेंसी नोट गिनने की मशीन और कुछ कपड़े भी जब्त किए.
अबतक ATS कर रही थी जांच हिरेन की मौत के मामले की जांच अभी तक महाराष्ट्र पुलिस के आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) द्वारा की जा रही थी. जिसकी निगरानी मुख्य अतिरिक्त महानिदेशक जय जीत सिंह और उप महानिरीक्षक शिवदीप लांडे कर रहे थे. हिरेन की डेड बॉडी गायब होने के एक दिन बाद 5 मार्च को मिली थी.
महाराष्ट्र पुलिस के सूत्रों ने कहा कि 4 मार्च की रात को, हिरेन के मोबाइल लोकेशन अक्सर बदलते रहे. हिरेन के मोबाइल फोन की आखिरी लोकेशन तुंगेश्वर नेशनल पार्क थी. 4 मार्च की रात में, अंतिम लोकेशन वसई शहर का था और तब जाकर फोन बंद हो गया. हिरेन का मोबाइल फोन बरामद होना अभी बाकी है.
चोरी नहीं हुई थी एसयूवी जांच से जुड़े एनआईए के एक सूत्र ने कहा कि वाजे कथित तौर पर एंटीलिया के पास उस जगह पर मौजूद था, जहां विस्फोटक से भरी एसयूवी 25 फरवरी को पार्क की गई थी. निलंबित किए गए विवादास्पद एपीआई वाजे ने मौके से भागने के लिए एक पुलिस कार (टोयोटा इनोवा) का इस्तेमाल किया. बाद में इनोवा को मुंबई पुलिस आयुक्तालय कार्यालय से जब्त कर लिया गया.
एनआईए अधिकारियों को संदेह है कि एसयूवी की कभी चोरी नहीं हुई थी. वाहन का उपयोग वाजे द्वारा किया जा रहा था और उनके आवासीय सोसायटी में पार्क किया गया था. अपराध को अंजाम देने के बाद, वाजे ने कथित तौर पर अपनी सोसायटी में खड़ी एसयूवी के सीसीटीवी फुटेज को जब्त करने के लिए डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर (डीवीआर) ले लिया था.
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