Assam CM On Muslim Population: असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शुक्रवार (19 जुलाई) को दावा किया कि उनके राज्य में मुस्लिम आबादी हर 10 साल में करीब 30 प्रतिशत बढ़ रही है और 2041 तक वे बहुसंख्यक बन जाएंगे. उन्होंने कहा कि हर 10 साल में मुसलमानों की आबादी 11 लाख तक बढ़ जाती है. वहीं, हिंदू समुदायों की आबादी सिर्फ 16 प्रतिशत बढ़ रही.


सीएम सरमा ने कहा, "2011 में असम में 1.4 करोड़ मुस्लिम थे. 2041 तक असम मुस्लिम बहुल राज्य बन जाएगा. यह एक वास्तविकता है और इसे कोई नहीं रोक सकता." मुख्यमंत्री ने कहा, "हर 10 साल में असम में मुस्लिम आबादी 11 लाख बढ़ जाती है. यह हिमंत बिस्वा सरमा का डेटा नहीं है, बल्कि भारतीय जनगणना का डेटा है. ये डेटा पब्लिश हो चुका है." सरमा ने कहा कि हिंदू समुदाय की आबादी हर 10 साल में लगभग 16 प्रतिशत बढ़ रही है.


सीएम सरमा के आंकड़ों में कितना दम?


न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, 2011 की जनगणना के अनुसार, असम में कुल मुस्लिम आबादी 1.07 करोड़ थी, जो कुल 3.12 करोड़ निवासियों का 34.22 प्रतिशत थी. राज्य में 1.92 करोड़ हिंदू थे, जो कुल आबादी का लगभग 61.47 प्रतिशत था.


असम सरकार की योजना


असम सीएम ने कहा कि उनकी सरकार ने मुस्लिम समुदाय की जनसंख्या वृद्धि को कम करने के लिए कदम उठाए हैं. मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘कई लोगों ने हमारी मदद भी की है. अगर 'निजुत मोइना' योजना सफल होती है तो लड़कियां चिकित्सक और इंजीनियर बनेंगी. फिर वे (बच्चों को) जन्म नहीं देंगी.’’


इस योजना के तहत असम सरकार बाल विवाह को रोकने के उद्देश्य से कक्षा 11 से स्नातकोत्तर तक की छात्राओं को अगले पांच वर्षों तक 2,500 रुपये तक का मासिक मानदेय प्रदान करती है. उन्होंने कहा, 'पिछले तीन सालों में हमारी सरकार के उठाए गए कदमों से हमें कुछ परिणाम मिलेंगे, लेकिन समस्या बहुत बड़ी है.' उन्होंने ये भी पकहा, ‘‘ 2041 तक असम मुस्लिम बहुल राज्य बन जाएगा. यह एक वास्तविकता है और इसे कोई नहीं रोक सकता.’’


मुस्लिम जनसंख्या रोकने को राहुल गांधी से किया आग्रह


उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा,‘‘ मुसलमानों की जनसंख्या वृद्धि को रोकने में कांग्रेस की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है. अगर राहुल गांधी जनसंख्या नियंत्रण के ब्रांड एंबेसडर बन जाते हैं तो इस पर काबू पाया सकता है क्योंकि समुदाय केवल उनकी बात सुनता है.’’


‘मुस्लिम राजनेताओं के दो बच्चे दूसरों को नहीं देते सलाह’


बीजेपी नेता ने कहा, 'मुस्लिम राजनीतिक नेताओं के खुद दो बच्चे हैं, लेकिन वे कभी भी ग्रामीणों को बच्चों की संख्या दो तक सीमित रखने की सलाह नहीं देते हैं.' उन्होंने यह भी कहा कि अगर पहले के मुख्यमंत्री 'धर्मनिरपेक्ष नहीं होते' और 1971 या 1981 से ही उनकी तरह जनसंख्या विस्फोट के बारे में बोलते तो राज्य को सकारात्मक परिणाम मिले होते.  


उन्होंने कहा, 'अगर सरकार ने मुस्लिम लड़कियों की शिक्षा के लिए और बाल विवाह के खिलाफ कदम उठाए होते तो यह स्थिति पैदा नहीं होती. मैं सिर्फ तीन साल में कोई चमत्कार नहीं कर सकता. अगर यह (मुसलमानों का बहुसंख्यक बनना) 2051 तक टल जाता है तो हम मानेंगे कि हमने कुछ किया है.'


‘नसबंदी करते हैं तो सफल हो सकते हैं’


सरमा ने दावा किया कि जब वे कांग्रेस के कार्यकाल में असम के स्वास्थ्य मंत्री थे, तब 2009 में एक लाख पुरुषों की नसबंदी की गई थी. उन्होंने कहा, "धीरे-धीरे कार्यक्रम बंद कर दिया गया. अगर हम इस प्रक्रिया को जारी रख सकते हैं तो हम काफी हद तक सफल हो सकते हैं. ऐसा भी नहीं है कि सभी महिलाएं पांच-आठ बच्चों को जन्म देना चाहती हैं. कुछ सक्षम करने वाले कारक हैं जो संख्या बढ़ाने में मदद करते हैं." 


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