अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का विरोध विपक्षी पार्टियां भी नहीं कर सकतीं: भागवत
29 अक्टूबर से अयोध्या विवाद में रोजाना सुनवाई होनी है. नवनियुक्त चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की बेंच करेगी सुनवाई. सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाईकोर्ट के जमीन बंटवारे के फैसले को चुनौती दी गई है. सुप्रीम कोर्ट जमीन का मालिकाना हक तय करेगा.
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नई दिल्ली: राम मंदिर को लेकर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने बड़ा बयान दिया है. भागवत ने कहा है कि विरोधी पार्टियां चाह कर भी राम मंदिर का विरोध नहीं कर सकते. भागवत ने कहा कि हिंदू न कहने वालों में भी बहुत बड़ा हिस्सा ऐसा है जिनके श्रद्धा स्थान राम हैं. भागवत ने यहा भी कहा कि राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ और बीजेपी अयोध्या में राममंदिर बनाने के लिए प्रतिबद्ध है लेकिन कुछ चीजों में वक्त लगता है.
सोमवार को पतंजलि योगपीठ के कार्यक्रम में मोहन भागवत ने कहा, ''राम मंदिर का विरोध करने वाली पार्टियों में रहकर भी खुला राम मंदिर का विरोध करने वाला कोई नहीं है, क्योंकि वो जानते हैं कि हम कुछ भी कहें देश की करोड़ों हिंदू प्रजा और हिंदू न कहने वालों में भी बहुत बड़ा हिस्सा ऐसा है जिनके श्रद्धा स्थान राम हैं.''
भागवत ने कहा, 'यहां तक कि विपक्षी दल भी खुलेआम अयोध्या में राम मंदिर का विरोध नहीं कर सकते हैं क्योंकि उन्हें पता है कि देश का बहुसंख्यक समुदाय भगवान राम की पूजा करता है. लेकिन कुछ चीजों में समय लगता है.'
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि हर सरकार की कुछ सीमाएं होती हैं और इसके बीच उसे काम करना होता है. हालांकि संत और पुरोहित इन सब सीमाओं से बंधे नहीं होते हैं और उन्हें धर्म, देश और समाज के उत्थान के लिए काम करना चाहिए.
वहीं इसी कार्यक्रम में योग गुरू स्वामी रामदेव ने कहा कि जहां मंत्री और धनी लोग असफल हो जाते हैं वहां पर अक्सर साधु लोग सफल होते हैं. रामदेव ने कहा, 'मंत्रियों और धनी लोगों को आवश्यक रूप से यह समझना होगा कि संत और महंत उनसे ज्यादा सक्षम हैं. वे वहां सफल हो सकते हैं जहां अमीर लोग और मंत्री असफल होते हैं.'
राम मंदिर मामला सुप्रीम कोर्ट में, जानें आगे क्या होगा ? 29 अक्टूबर से अयोध्या विवाद में रोजाना सुनवाई होनी है. नवनियुक्त चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की बेंच करेगी सुनवाई. सुप्रीम कोर्ट में इलाहाबाद हाईकोर्ट के जमीन बंटवारे के फैसले को चुनौती दी गई है. सुप्रीम कोर्ट जमीन का मालिकाना हक तय करेगा. सुप्रीम कोर्ट पहले ही कह चुका है कि केस की सुनवाई धार्मिक आधार पर नहीं होगी.
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