नई दिल्ली: राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को बाकायदा विदाई देने के लिए संसद के सेंट्रल हॉल में कार्यक्रम हुआ और उन्हें भावपूर्ण विदाई दी गई. इस मौके पर लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने कहा कि संसद के सभी सदस्यों के लिए राष्ट्रपति के प्रति अपना सम्मान व्यक्त करने का एक अच्छा मौका है.


इसके साथ ही उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी की जमकर तारीफ की और कहा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में राष्ट्रपति के पद की प्रतिष्ठा और गरिमा बढ़ाई. हामिद अंसापी ने कहा कि राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर राष्ट्रपति मुखर्जी के विचारों ने शीर्ष पद का कद बढ़ाया है.


अपने विदाई भाषण में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने भावपूर्ण विदाई के लिए सभी संसद सदस्यों और सेंट्रल में मौजूद सभी गणमान्य लोगों का शुक्रिया अदा किया. मुखर्जी ने इस मौके पर पूर्व पीएम इंदिरा गांधी को अपना मेनटॉर बताया. इसके साथ ही उन्होंने अतीत के दूसरे कई बड़े नेताओं को याद किया. अपने भाषण के दौरान उन्होंने अपने 37 साल के संसदीय जीवन के कई क्षणों का जिक्र भी किया.


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा, '' मेरे जेहन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ जुड़ाव की खूबसूरत यादें रहेंगी और उनका मेरे प्रति स्नेही और विनम्र व्यवहार मुझे हमेशा याद रहेगा.''


इस मौके पर राष्ट्रपति मुखर्जी ने ये भी कहा कि अध्यादेश का रास्ता केवल अपरिहार्य परिस्थिति में अपनाया जाना चाहिए.

राष्ट्रपति मुखर्जी ने संसद के एक सदस्य के तौर पर अपने दिनों को याद करते हुए कहा, ''संसद बहस, चर्चा, असहमति व्यक्त करने का स्थान होता है और संसद की कार्यवाही बाधित होने से सबसे अधिक नुकसान विपक्ष को होता है.''

इस समारोह में उप राष्ट्रपति, स्पीकर, प्रधानमंत्री मोदी, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और सरकार के मंत्री और दोनों सदनों के सांसद मौजूद रहे.


आपको बता दें कि अपने 5 साल के कार्यकाल में प्रणब मुखर्जी राष्ट्रपति पद की गरिमा को नई ऊंचाईयों पर ले गए. एक शिक्षक से नेता और उसके बाद राष्ट्रपति तक का सफर तय करने वाले प्रणब मुखर्जी अपने शालीन व्यक्तिव और विद्वता के लिए जाने जाते हैं.


राष्ट्रपति पद के रूप में प्रणब दा का कार्यकाल कभी विवादों में नहीं रहा. प्रणब दा ने अपने कार्यकाल का तीन साल मोदी सरकार के साथ गुजारा लेकिन कभी राष्ट्रपति और सरकार के बीच टकराव की स्थिति नहीं आई.