किस्सा-ए-बजट: 'क्या मैंने तुम्हें इसलिए ही चुना था...', जब मनमोहन सिंह पर भड़क गए थे नरसिम्हा राव
ये मौका 1991-92 के बजट को पेश करने का था. इसी बजट के लिए मनमोहन सिंह का लोहा पूरी दुनिया ने माना, लेकिन इसके पहले ड्राफ्ट को देखकर नरसिम्हा राव बड़े उदास हो गए थे.
![किस्सा-ए-बजट: 'क्या मैंने तुम्हें इसलिए ही चुना था...', जब मनमोहन सिंह पर भड़क गए थे नरसिम्हा राव PV Narasimha Rao got angry on Manmohan Singh on budget first draft of Central Government किस्सा-ए-बजट: 'क्या मैंने तुम्हें इसलिए ही चुना था...', जब मनमोहन सिंह पर भड़क गए थे नरसिम्हा राव](https://feeds.abplive.com/onecms/images/uploaded-images/2023/02/01/0d2e77268cce4d135cfa2ac1a6d1f4211675219237331457_original.png?impolicy=abp_cdn&imwidth=1200&height=675)
Narsimha Rao And Manmohan Singh Budget: आज देश की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण मोदी सरकार 2.0 का आखिरी पूर्ण बजट पेश करेंगी. देश को बजट से बहुत उम्मीदें हैं. इसके साथ ही उद्योग निकायों ने वृद्धि और खपत बढ़ाने के लिए बजट में लीक से हटकर कुछ फैसले लिए जाने की उम्मीद भी जताई है. हालांकि, बजट कैसा होगा? उसे देखने और समझने में तो कुछ वक्त लगेगा, लेकिन हम आपको बजट से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा बताने जा रहे हैं.
देश के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पीवी नरसिम्हा राव की सरकार में वित्त मंत्री थे. मनमोहन सिंह की पहचान शुरू से ही एक बेहद ज्ञानी अर्थशास्त्री के रूप में रही है. 1990 के समय में जब देश में मंदी का दौर था, तब मनमोहन सिंह की नीतियों से ही देश पटरी पर लौटा था. हालांकि, तत्कालीन प्रधानमत्री पीवी नरसिम्हा राव मनमोहन सिंह के बजट के पहले ड्राफ्ट से बेहद परेशान हो गए थे.
बजट के पहले ड्राफ्ट से नाखुश थे राव
दरअसल, ये मौका 1991-92 के बजट को पेश करने का था. इसी बजट के लिए मनमोहन सिंह का लोहा पूरी दुनिया ने माना, लेकिन इसके पहले ड्राफ्ट को देखकर नरसिम्हा राव बड़े उदास हो गए थे और उन्होंने मनमोहन सिंह से ये तक दिया था कि "क्या मैंने तुम्हें इसलिए ही चुना था?" ये बात सुनते ही मनमोहन सिंह वहां से चले गए और कुछ दिन के बाद वो फिर लौटे और बजट ड्राफ्ट नरसिम्हा राव को पेश किया. जिसके लिए पूरी दुनिया उन्हें आज तक याद करती है.
मनमोहन सिंह ने दिया सबसे लंबा बजट भाषण
24 जुलाई 1991 को बजट भाषण देते हुए मनमोहन सिंह ने खुलकर अपनी बात रखी. वैसे तो उनकी पहचान कम बोलने वालों में ही की जाती है लेकिन उस बजट भाषण में उन्होंने खुलकर अपनी बात रखी. मनमोहन सिंह का ये बजट भाषण आज तक का सबसे लंबा बजट भाषण भी है. इस बजट भाषण में लाइसेंस प्रक्रिया को आसान बनाने के साथ-साथ उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण की बात कही गई थी.
पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने उठाए थे सवाल
मनमोहन सिंह के इस बजट ने मिडिल क्लास में गजब का आत्मविश्वास पैदा किया था. हालांकि, बाद में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने 1991-92 के बजट की तुलना ईस्ट इंडिया कंपनी से कर दी थी. उन्होंने कहा था कि ऐसे ही ईस्ट इंडिया कंपनी भारत आई थी और देश को गुलाम बनाया था.
'मैंने तो आपके आदमी को ही वित्त मंत्री बनाया है'
इस पर संसद में तत्कालीन प्रधानमंत्री राव ने चुटकी लेते हुए कहा था, "चंद्रशेखर जी मैंने तो आपके आदमी को ही वित्त मंत्री बनाया है, फिर आप आलोचना क्यों कर रहे हैं." इस पर चंद्रशेखर ने जवाब दिया, "बात तो आपकr सही है, लेकिन जिस चाकू को हम सब्जी काटने के लिए लाए थे, उससे आप दिल का ऑपरेशन कर रहे हैं."
बता दें कि इस ऐतिहासिक बजट को पेश करते हुए मनमोहन सिंह ने संसद में एक शेर भी पढ़ा था. उन्होंने कहा, "यूनान-ओ-मिस्र-ओ-रोम जब मिट गए जहां से अब तक मगर है बाकी, नाम-ओ-निशां हमारा"
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