Rajasthan Assembly Election 2023: अगले महीने होने वाले राजस्थान विधानसभा चुनाव पर पूरे देश की नजर है. मौजूदा कांग्रेस सरकार जहां अपने काम की बदौलत फिर से जीत का दावा कर रही है, तो दूसरी ओर बीजेपी करप्शन जैसे मुद्दे को उठाते हुए सत्ता में वापसी की बात कह रही है. कई सर्वे में भी इस बार कांग्रेस और बीजेपी के बीच कड़े मुकाबले की बात सामने आई है.
राजस्थान हर बार सत्ता परिवर्तन देखता है, क्या इस बार भी ऐसा ही होगा या यह परंपरा टूटेगी, ये तो तीन दिसंबर को ही साफ होगा, लेकिन जीत हार का अंतर काफी करीबी होगा. इसकी वजह हैं नए वोटर. नए वोटर ही इस बार राजस्थान में लगभग हर सीट पर प्रत्याशियों की जीत-हार तय कर सकते हैं. आइए जानते हैं क्या कहते हैं आंकड़े.
पहले समझें आंकड़ों का गणित
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, इस बार राजस्थान में कुल मतदाताओं की संख्या 5.26 करोड़ है. इसमें महिला मतदाता 2.15 करोड़ तो पुरुष मतदाता 2.73 करोड़ हैं. इन आंकड़ों में सबसे खास बात नए वोटर हैं, जिनकी संख्या करीब 22 लाख 20 हजार है. इसे विस्तार से देखें तो इस बार विधानसभा चुनाव के लिए प्रदेश की सभी 200 विधानसभा सीटों पर करीब 5 से 14 हजार नए वोटर जुड़े हैं.
इसलिए युवा वोटर का रोल होगा अहम
अगर आप इस बार के फर्स्ट टाइम वोटरों की संख्या की तुलना 2018 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और बीजेपी को मिले वोट के अंतर से करेंगे तो यह 12 गुना से ज्यादा है. यही नहीं, पिछले विधानसभा चुनाव में 130 से ज्यादा सीटों पर जीत और हार का अंतर इस बार जुड़े नए वोटरों से कम था. इसमें भी करीब 10 सीटों पर जीत-हार का मार्जिन 1 हजार वोट से भी कम था. ऐसे में साफ है कि इस बार नए वोटर ही अधिकतर प्रत्याशियों की जीत-हार को तय करेंगे. उनका रुझान जिस तरफ होगा उसका पलड़ा भारी हो सकता है. इसी को देखते हुए दोनों दल युवाओं को रिझाने में लगे हैं.
क्या था पिछली बार दोनों दलों का वोट प्रतिशत
2018 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज की थी और अशोक गहलोत की अगुवाई में पार्टी ने सरकार बनाई थी. तब आए नतीजों में दोनों पार्टियों के कुल वोट प्रतिशत में एक पर्सेंट से भी कम का अंतर था. तब कांग्रेस का वोट प्रतिशत 39.3 था, जबकि बीजेपी का वोट प्रतिशत 38.8 था.
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