यहां पढ़ें: महाराष्ट्र में किसान आंदोलन का चेहरा राजू शेट्टी
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नई दिल्ली: महाराष्ट्र में किसानों की महाहड़ताल को दो दिन के लिए रोक दिया गया है. आंदोलन कर रहे किसान नेताओं ने दो दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि राज्य सरकार ठोस प्रस्ताव लेकर आए वरना उनका आंदोलन और तेज होगा. इस आंदोलन का कोई एक नेता नहीं है लेकिन इसकी भूमिका स्वाभिमानी शेतकारी संगठन के अध्यक्ष और एनडीए के सहयोगी राजू शेट्टी ने खड़ी की है.
मराठी में किसानों को शेतकारी कहा जाता है, इसी आधार पर राजू शेट्टी ने अपने संगठन का नाम स्वाभिमानी शेतकारी संगठन रखा है. जैसा कि नाम से पता चलता है उनकी पार्टी किसानों की आवाज उठाती है. महाराष्ट्र की इस क्षेत्रीय पार्टी के वो एकमात्र सांसद हैं और विधानसभा में भी उनकी पार्टी का एक ही विधायक है.
कौन हैं किसान नेता राजू शेट्टी? पेशे से किसान और पढ़ाई से मैकेनिकल इंजीनियर राजू शेट्टी के राजनीति में आने और किसानों के हक की लड़ाई शुरू करने की कहानी बेहद दिलचस्प है. राजनीति में कदम रखने से पहले राजू शेट्टी किसानों के बड़े नेता रहे शरद जोशी के साथ कई सालों तक जुड़े रहे. 2002 में उन्होंने जिला परिषद का चुनाव लड़ा और चीनी मिल के वायस चेयरमैन को हरा दिया. हार से बौखलाए समर्थकों ने राजू के साथ मारपीट कर खेतों में फेंक दिया. कुछ किसानों ने उनकी जान बचाई जिसके बाद उन्होंने किसानों के हित में काम करना शुरू कर दिया.
राजू शेट्टी 2004 में पहली बार विधायक बने. उसके बाद 2009 में पहली बार लोकसभा सांसद बने. 2014 में दोबारा सांसद चुने गए. इसी साल उन्होंने अपनी पार्टी स्वाभिमानी शेतकारी संगठन का भी गठन किया. राजू शेट्टी का दावा है कि जिला परिषद से लेकर लोकसभा चुनाव तक उन्होंने सिर्फ किसानों से मिले चंदे के पैसे से ही लड़ा है. राजू शेट्टी की पश्चिमी महाराष्ट्र के किसानों पर अच्छी पकड़ है जिसकी वजह से 2014 विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने उन्हें अपने साथ मिला लिया था. लेकिन अब 3 साल बाद उनका एनडीए से मोहभंग हो रहा है.
राजू शेट्टी ने सरकार को उन्होंने सबसे बड़े संकट में डाल दिया है. पिछले महीने उन्होंने किसानों की बदहाली और कर्ज माफी को लेकर पुणे से मुंबई तक आत्मकलेश यात्रा निकाली. इसी यात्रा के बाद महाराष्ट्र में किसानों के आंदोलन की नींव तैयार हुई. राजू शेट्टी अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 3 साल पुराना वादा याद दिला रहे हैं. राजू शेट्टी अपने ही सरकार से आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं. ऐसे में देखना दिचस्प होगा कि सरकार कैसे अपने ही सहयोगी से निपटती है.
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