Indian Politics: RSS और BJP में सबकुछ ठीक नहीं? अध्यक्ष चुनाव के बीच आ गया संघ का जवाब
Arun Kumar: BJP अध्यक्ष चुनावी पर अटकलों पर RSS ने स्पष्ट किया कि इसमें उसकी कोई भूमिका नहीं है. संघ के सीनियर पदाधिकारी ने इसे पार्टी का आंतरिक मामला बताते हुए कहा कि चुनाव प्रक्रिया जल्द पूरी होगी.

BJP President Election: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने शनिवार (22 मार्च) को साफ कर दिया कि भाजपा के नए अध्यक्ष के चयन को लेकर उसका पार्टी के साथ कोई मतभेद नहीं है. आरएसएस ने कहा कि ये फैसला पूरी तरह से भाजपा पर निर्भर है और जल्द ही चुनाव प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी.
शनिवार (22 मार्च) को बेंगलुरु में आयोजित अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के दौरान आरएसएस के संयुक्त महासचिव अरुण कुमार ने भाजपा अध्यक्ष के लंबित चुनाव को लेकर पूछे गए सवालों का जवाब दिया. उन्होंने कहा कि संघ के सदस्य 32 संबद्ध संगठनों में कार्यरत हैं और प्रत्येक संगठन स्वतंत्र रूप से अपनी फैसला लेने की प्रक्रिया अपनाता है.
चुनाव प्रक्रिया पर दिया गया बयान
अरुण कुमार ने स्पष्ट किया कि भाजपा अध्यक्ष के चुनाव के लिए कोई समन्वय समिति की बैठक नहीं होगी. उन्होंने कहा कि भाजपा और आरएसएस के बीच कोई अंतर नहीं है. दोनों संगठन समाज और देश के लिए मिलकर काम करते हैं. भाजपा की चुनाव प्रक्रिया जारी है और जल्द ही अध्यक्ष का चयन किया जाएगा.
भाजपा अध्यक्ष पद के लिए कौन होगा अगला चेहरा?
वर्तमान भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा अपने कार्यकाल का विस्तार करते हुए इस पद पर बने हुए हैं. इस बीच अटकलें लगाई जा रही हैं कि भाजपा और आरएसएस किसी उपयुक्त उम्मीदवार पर सहमत नहीं हो पा रहे हैं, जिससे दोनों संगठनों के बीच संभावित मतभेद की खबरें आ रही थी, लेकिन आरएसएस के स्पष्टीकरण के बाद ये साफ हो गया कि चुनाव प्रक्रिया जल्द ही पूरी होगी.
राष्ट्रीय एकता पर जोर
राष्ट्रीय अखंडता पर बोलते हुए आरएसएस नेता अरुण कुमार ने कहा कि भारत में कई भाषाएं और संस्कृतियां हैं, लेकिन भावनाएं एक हैं. उन्होंने कहा कि देश में 'एक लोग, एक राष्ट्र' की भावना को बनाए रखना जरूरी है और भाषा या संस्कृति के नाम पर कोई मतभेद नहीं होना चाहिए.
मजबूत समाज ही राष्ट्र की ताकत- RSS नेता अरुण कुमार
आरएसएस नेता अरुण कुमार ने कहा कि संघ का मुख्य उद्देश्य एक मजबूत समाज का निर्माण करना है जो देशभक्ति, एकता, अनुशासन और 'राष्ट्र प्रथम' की भावना को अपनाए. उन्होंने कहा कि यदि समाज संगठित और मजबूत होगा तो चुनौतियों का प्रभावी समाधान किया जा सकेगा. उन्होंने ये भी कहा कि समाज की शक्ति सर्वोपरि है और आरएसएस केवल एक संगठन नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन का एक जन आंदोलन है.
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