S Jaishankar Visits UK: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से व्हाइट हाउस में बहस के बाद यूक्रेन के राष्ट्रपति ब्रिटेन गए थे. जब जेलेंस्की को ट्रंप से फटकार लगी तो ब्रिटिश पीएम स्टारमर खुलकर उनके समर्थन में आए और उन्होंने यूरोपीय नेताओं की बैठक भी बुलाई थी. अब इसी ब्रिटेन में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर भी जा रहे हैं. अब देखना होगा कि यूरोपीय देश जयशंकर से यूक्रेन और जेलेंस्की को लेकर चर्चा करेंगे या फिर भारत के साथ केवल द्विपक्षीय वार्ता ही होगी.
विदेश मंत्री एस जयशंकर छह दिन के यूरोपीय दौरे पर जा रहे हैं. वह 4 मार्च से ब्रिटेन और आयरलैंड का छह दिवसीय दौरे पर रहेंगे. जयशंकर के इस दौरे का मकसद द्विपक्षीय सहयोग को और बढ़ावा देने पर होगा. जयशंकर सबसे पहले लंदन जाएंगे और ब्रिटिश विदेश मंत्री डेविड लैमी के साथ द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर बातचीत करेंगे. उसके बाद 6-7 मार्च को जयशंकर आयरलैंड की यात्रा पर रहेंगे. इस दौरान वह अपने आयरिश समकक्ष साइमन हैरिस और अन्य व्यक्तियों के साथ भारतीय समुदाय के लोगों से भी मुलाकात करेंगे. विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया है कि विदेश मंत्री की यात्रा ब्रिटेन और आयरलैंड दोनों के साथ भारत के मैत्रीपूर्ण संबंधों को नई दिशा मिलेगी.
ब्रिटेन के साथ मुक्त व्यापार पर हो सकती है चर्चा
ऐसी चर्चा है कि जयशंकर और ब्रिटिश विदेश मंत्री के बीच महत्वाकांक्षी भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत होने की उम्मीद है. बीते महीने भारत-ब्रिटेन ने ब्रिटिश व्यापार सचिव जोनाथन रेनॉल्ड्स की नई दिल्ली यात्रा के दौरान इसपर बातचीत फिर से शुरू हुई. जयशंकर की यात्रा से पहले विदेश मंत्रालय की ओर से कहा गया है, 'भारत और ब्रिटेन के बीच एक व्यापक रणनीतिक साझेदारी है, जो रक्षा-सुरक्षा, व्यापार और अर्थव्यवस्था, स्वास्थ्य, शिक्षा और दोनों देशों के बीच संबंधों समेत विविध क्षेत्रों में मजबूत हुई है.'
एस जयशंकर के दौरे पर दुनिया की नजर
हालांकि एस जयशंकर की ये यात्रा ऐसे समय पर हो रही है, जब ट्रंप और जेलेंस्की के बीच बहस के बाद ब्रिटेन में यूरोपीय नेताओं का जुटान हो चुका है. ऐसे में जयशंकर की यात्रा पर अमेरिका और रूस के साथ-साथ पूरी दुनिया की नजरें होंगी. उनकी इस यात्रा पर यूक्रेन और ट्रेड डील का मुद्दा भी छाया रहेगा. हालांकि यूक्रेन को लेकर भारत का स्टैंड वही है, जो शुरू से रहा है. पीएम मोदी ने जो संदेश दिया था कि युद्ध छोड़ो और बुद्ध की राह पर चलो, विदेश मंत्री यह संदेश एक बार फिर दोहरा सकते हैं.
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