Shashi Tharoor: कांग्रेस नेता शशि थरूर के पिछले दिनों के कुछ बयान देखें तो यह साफ हो जाता है कि उनके और पार्टी के बीच सबकुछ ठीक नहीं है. केरल में लेफ्ट सरकार और पीएम मोदी की तारीफ से लेकर उनकी सोशल मीडिया पोस्ट और हालिया इंटरव्यू में जो कुछ भी उन्होंने बोला, वह कुछ हद तक बगावती तेवर जैसा नजर आ रहा है. ऐसे में लग रहा है कि एक के बाद एक अपने बड़े नेता खो रही कांग्रेस को शायद जल्द ही एक और बड़ा झटका लग जाए.

दरअसल, एक लंबे अरसे से शशि थरूर कांग्रेस पार्टी में हाशिए पर नजर आए हैं. कांग्रेस अध्यक्ष का चुनाव हो या किसी मुद्दे पर स्टैंड हो, शशि थरूर ऐसे कई मौकों पर कांग्रेस में अलग-थलग पड़े दिखाई दिए हैं. अब लग रहा है कि वह आर-पार लड़ाई के मूड में हैं.

पीएम मोदी और एलडीएफ सरकार की तारीफशशि थरूर ने हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अमेरिका यात्रा और डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात को लेकर कांग्रेस पार्टी से अलग विचार रखे थे. उन्होंने कहा था, 'प्रधानमंत्री मोदी की अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के साथ यात्रा के कुछ महत्वपूर्ण परिणामों में मैंने पाया कि भारतीय लोगों के दृष्टिकोण से इसमें कुछ अच्छी बातें हैं.' इसके साथ ही उन्होंने हाल ही में केरल की एलडीएफ सरकार की कुछ नीतियों की भी तारीफ की थी. कांग्रेस उनके इन बयानों से असहज थी और पार्टी ने इन बयानों को थरूर की निजी राय बताया था.

राहुल गांधी से मुलाकातइसके बाद यह भी सामने आया कि थरूर ने राहुल गांधी से अपनी भूमिका स्पष्ट करने की मांग की थी. थरूर ने यह भी शिकायत की थी कि संसद में अहम मुद्दों पर पार्टी के भीतर उनकी अनदेखी की जा रही है, लेकिन राहुल गांधी की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला. 

अब ये तीन बयान देखें..

शशि थरूर ने शनिवार (22 फरवरी) को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा, 'जहां अज्ञान ही सुख है, वहां बुद्धिमान होना मूर्खता है' थॉमस ग्रे की लिखी इस पंक्ति के जरिए शशि थरूर कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते नजर आए.

रविवार (23 फरवरी) को इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में भी उनका बयान चौंकाने वाला रहा. इंडियन एक्सप्रेस के साथ एक मलयाली पोडकास्ट में बातचीत के दौरान थरूर ने केरल में आगामी विधानसभा चुनावों को लेकर कहा, 'कई ऑर्गनाइजेशन के सर्वे में यह साफ हुआ है कि केरल में नेतृत्व संभालने के लिए मैं दूसरों से आगे हूं. अगर कांग्रेस मेरा इस्तेमाल करना चाहती है, तो मैं तैयार हूं. अगर उन्हें मेरी जरूरत नहीं, तो मेरे पास करने के लिए अपने काम भी हैं. आपको यह नहीं सोचना चाहिए कि मेरे पास कोई और विकल्प नहीं है. मेरे पास किताबें, भाषण और दुनिया भर से निमंत्रण हैं.'

23 फरवरी को ही जब उनसे पूछा गया कि क्या आपके और पार्टी के बीच सबकुछ ठीक नहीं है तो उन्होंने इस बात को खारिज नहीं किया. उन्होंने कहा कि मैं इस पर कोई टिप्पणी नहीं करूंगा. थरूर के इस जवाब ने सस्पेंस को और बढ़ा दिया.

आगे क्या होगा?शशि थरूर फिलहाल कांग्रेस पार्टी द्वारा नजरअंदाज किए जाने से नाराज हैं, वहीं कांग्रेस उनके बयानों के कारण असहज महसूस कर रही है. कांग्रेस पार्टी अगर थरूर को कोई बड़ी भूमिका दे देती है तो यह आपसी संघर्ष यहीं खत्म हो सकता है लेकिन अगर ऐसा नहीं होता है तो संभव है कि थरूर अपना रास्ता कांग्रेस से अलग कर लें.

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