आंदोलनकारी किसानों ने कहा- हमें बजट से फर्क नहीं पड़ता, सिर्फ कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की चिंता
सिंघु बॉर्डर पर आंदोलन कर रहे किसानों ने कहा कि यहां इंटरनेट सर्विस नहीं है इसलिए उन्हें बजट के बारे में पता नहीं है. उन्होंने कहा कि हमारा सिर्फ एक ही लक्ष्य है कि तीनों कृषि कानून वापस लिए जाएं.
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नई दिल्ली: दिल्ली की सीमाओं पर प्रदर्शन कर रहे किसानों ने सोमवार को कहा कि उन्हें केवल कृषि कानूनों को वापस लिए जाने की चिंता है और केंद्रीय बजट में कृषि क्षेत्र को क्या दिया गया है इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता. सिंघू बॉर्डर पर ज्यादातर किसान बजट से अनभिज्ञ हैं. उन्होंने कहा कि आंदोलन स्थल पर इंटरनेट उपलब्ध नहीं है इसलिए उन्हें इसके बारे में कुछ नहीं पता.
हरियाणा के कैथल जिले के निवासी 48 साल के रणधीर सिंह ने कहा, “अभी हमारा लक्ष्य केवल यही है कि तीनों कानून वापस लिए जाएं. केंद्रीय बजट हमारी चिंता का विषय नहीं है.” रणधीर सिंह के ही गांव के रहने वाले पाला राम ने भी ऐसे ही विचार व्यक्त किए. उन्होंने कहा, “कुछ लोगों ने मुझे कृषि क्षेत्र के लिए की गई घोषणाओं के बारे में बताया लेकिन वह अलग चीज है, हम इस समय उसके लिए चिंतित नहीं हैं.” पंजाब के पटियाला के निवासी 65 साल के अवतार सिंह ने कहा कि सरकार को किसानों की आय बढ़ाने के तरीके बताने चाहिए थे.
किसान करेंगे चक्का जाम
इस बीच संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा कि 6 फरवरी को पूरे देश में दिन में 12 बजे से 3 बजे तक राष्ट्रीय और राज्य मार्गों का चक्का जाम किया जाएगा. बता दें कि संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का आंदोलन दो महीने से अधिक समय से चल रहा है.
संसद में कृषि कानूनों को विरोध
उधर आज वित्त मंत्री सीतारमण जब बजट पेश कर रही थीं तब शिरोमणि अकाली दल की हरसिमरत कौर बादल, सुखवीर सिंह बादल, आम आदमी पार्टी के भगवंत मान और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के हनुमान बेनीवाल ने तीन नए कृषि कानूनों को लेकर विरोध दर्ज कराया. हरसिमरत, सुखवीर, बेनीवाल अपने हाथों में तख्ती लिये हुए थे जिनमें केंद्र सरकार से तीनों कानूनों को वापस लेने की मांग वाले नारे लिखे थे. हरसिरमत कौर बादल, सुखवीर बादल और हनुमान बेनीवाल ने सदन से वॉकआउट भी किया.
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