पहली बार किसी हाई कोर्ट के जस्टिस के खिलाफ CBI करेगी जांच, SC के चीफ जस्टिस ने दी इजाज़त
इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस एस एन शुक्ला के खिलाफ सीबीआई जांच करेगी. पहली बार है जब कोई जांच एजेंसी किसी मौजूदा जज के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच करेगी.
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नई दिल्ली: इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज जस्टिस एस एन शुक्ला भ्रष्टाचार के मामले में फंसते नज़र आ रहे हैं. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने सीबीआई को उनके खिलाफ FIR दर्ज करने की इजाजत दे दी है. ऐसा पहली बार होगा जब कोई जांच एजेंसी किसी मौजूदा जज के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच करेगी. जस्टिस शुक्ला पर एक मेडिकल कॉलेज को फायदा पहुंचाने के लिए गलत आदेश देने का आरोप है.
2017 में हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच के जज जस्टिस शुक्ला ने एक मेडिकल कॉलेज को 2017-18 सत्र के लिए छात्रों का दाखिला लेने की इजाज़त दी थी. ये पाया गया कि सुप्रीम कोर्ट की तरफ से एडमिशन के लिए तय समय सीमा के परे जाकर उस कॉलेज को दाखिला लेने की अनुमति दी गई. यूपी के एडवोकेट जनरल ने सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा को इसकी जानकारी दी. जस्टिस मिश्रा ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एक आंतरिक जांच कमिटी बना दी.
अलग-अलग हाई कोर्ट के 3 वरिष्ठ जजों की कमिटी ने पूरे मामले में जस्टिस शुक्ला के जानबूझकर गलत आचरण करने की रिपोर्ट दी. तब तक इस मामले में न्यायपालिका को प्रभावित करने के लिए रिश्वत के आरोप सामने आ चुके थे. चीफ जस्टिस ने जस्टिस शुक्ला से खुद ही पद से हट जाने को कहा. उनके इनकार के बाद 22 जनवरी 2018 को उनसे न्यायिक काम ले लिए गए. यानी एक तरह से उन्हें छुट्टी पर भेज दिया गया.
तब चीफ जस्टिस ने CBI से भी मामले की जांच के लिए कहा था. शुरुआती जांच के बाद भेजी गई चिट्ठी में CBI निदेशक ने जस्टिस शुक्ला पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की पुष्टि होने की बात कही. नियमित केस दर्ज करने की इजाज़त मांगीं. दरअसल, 1991 में दिए एक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ये कह चुका है कि सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के मौजूदा जजों के खिलाफ केस दर्ज करने से पहले भारत के चीफ जस्टिस को उपलब्ध सबूत दिखाने होंगे. उनकी इजाज़त मिलने के बाद ही केस दर्ज हो सकेगा. CBI निदेशक की चिट्ठी में दर्ज बातों पर विचार करने के बाद चीफ जस्टिस ने FIR दर्ज करने की इजाज़त दे दी है.
नियमित केस दर्ज होने का साफ मतलब है कि अब ज़रूरत पड़ने पर जस्टिस एस एन शुक्ला को गिरफ्तार भी किया जा सकेगा. गौरतलब है कि पिछले दिनों जस्टिस शुक्ला ने चीफ जस्टिस को चिट्ठी लिख कर न्यायिक काम दोबारा सौंपने की दरख्वास्त की थी. जिससे उन्होंने मना कर दिया था. चीफ जस्टिस ने प्रधानमंत्री को भी चिट्ठी लिख कर जस्टिस शुक्ला को पद से हटाने के लिए संसद में प्रस्ताव रखे जाने की सिफारिश की है.
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