Supreme Court: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (15 जनवरी 2025) को वरिष्ठ सीपीआईएम नेता एमएम लॉरेंस की बेटियों की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अपने पिता के पार्थिव शरीर को सरकारी अस्पताल के बजाय उन्हें सौंपे जाने का अनुरोध किया था. जस्टिस हृषिकेश रॉय और एसवी एन भट्टी की पीठ ने केरल हाई कोर्ट के 18 दिसंबर, 2024 के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया.   


एमएम लॉरेंस की बेटियां पहुंची सुप्रीम कोर्ट


केरल हाई कोर्ट ने दिवंगत नेता की बेटियों आशा लॉरेंस और सुजाता बोबन की उस अपील को खारिज कर दिया था, जिसमें उन्होंने पिता के पार्थिव शरीर को मेडिकल कॉलेज को सौंपने के सिंगल जज के फैसले को चुनौती दी थी. हाई कोर्ट ने कहा था कि आशा लॉरेंस ने यह दावा नहीं किया था कि उसके पिता ने कभी भी ईसाई धार्मिक रीति-रिवाजों और प्रथाओं के अनुसार अपने शव का अंतिम संस्कार करने की इच्छा व्यक्त की थी. 


बेटे ने पार्थिव शरीर को दान देने का किया फैसला


लॉरेंस के बेटे सजीवन ने कहा था कि उनके पिता चाहते थे कि उनका शरीर वैज्ञानिक अध्ययन के लिए दान कर दिया जाए. लॉरेंस का 21 सितंबर, 2024 को 95 वर्ष की आयु में निधन हो गया था. उनके पार्थिव शरीर को एर्नाकुलम टाउन हॉल में श्रद्धांजलि के लिए रखा गया था, लेकिन 23 सितंबर को उस वक्त नाटकीय दृश्य देखने को मिला था जब दिवंगत नेता की बेटी आशा लॉरेंस ने उनके पार्थिव शरीर को मेडिकल कॉलेज को सौंपने के फैसले का विरोध किया. 


एमएम लॉरेंस ने पहले ही दे दी थी सहमति


इसके बाद उन्होंने अपने पिता के पार्थिव शरीर को शैक्षणिक उद्देश्यों के लिए मेडिकल कॉलेज को दान करने के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. उनकी बहन सुजाता भी उनके साथ शामिल हो गईं और उन्होंने भी यही राहत मांगी. हाई कोर्ट ने 23 अक्टूबर को उनकी याचिकाएं खारिज कर दी थी, जिसके बाद उन्होंने इसके खिलाफ अपील दायर की. मेडिकल कॉलेज के अधिकारियों ने कहा था कि लॉरेंस के बेटे सजीवन की ओर से दायर हलफनामे के अनुसार, कम्युनिस्ट नेता ने मार्च 2024 में दो गवाहों के सामने अपने पार्थिव शरीर को शैक्षणिक उद्देश्यों के वास्ते कॉलेज को सौंपने के लिए अपनी सहमति दी थी. 


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