भारत और चीन के कोर कमांडर स्तर की दसवें दौर की मीटिंग पूरे 16 घंटे चली. मीटिंग का उद्देश्य दूसरे चरण के डिसइंगेजमेंट पर बातचीत करना था. हालांकि, मीटिंग का नतीजा क्या रहा है इस पर कोई जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन दोनों सैन्य कमांडर्स ने पहले चरण के डिसइंगेजमेंट पर 'संतोष' जाहिर किया है.
जानकारी के मुताबिक, दसवें दौर की बैठक में दूसरे चरण के डिसइंगेजमेंट पर लंबी बातचीत हुई. ये मीटिंग एलएसी के मोल्डो गैरिसन में चीन की तरफ हुई थी. मीटिंग शनिवार सुबह 10 बजे शुरू हुई थी और देर रात 2 बजे खत्म हुई.
दोनों देशों ने जताया पहले चरण पर संतोष
पहले चरण के डिसइंगेजमेंट पर दोनों देशों के कोर कमांडर्स ने संतोष जताया. बैठक में दूसरे चरण के लिए पूर्वी लद्दाख से सटी एलएसी के डेपसांग प्लेन, गोगरा और हॉट स्प्रिंग में दोनों देशों की सेनाओं के पीछे हटना पर बातचीत हुई.
इस बैठक में भारतीय सेना की लेह स्थित 14वीं कोर के कमांडर, लेफ्टिनेंट जनरल पीजीके मेनन ने हिस्सा लिया, जबकि चीन की तरफ से पीएलए आर्मी के दक्षिणी शिंचियांग के मिलिट्री डिस्ट्रिक के कमांडर अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ शामिल हुए. बैठक में दूसरे चरण के डिसइंगेजमेंट के तहत पूर्वी लद्दाख से सटी एलएसी के डेपसांग प्लेन, गोगरा और हॉट स्प्रिंग में दोनों देशों की सेनाओं के पीछे हटना पर बातचीत हुई.
दूसरे चरण की डिसइंगेजमेंट बातचीत के नतीजे आएंगे सामने
बातचीत का नतीजा क्या रहा है, इसपर अभी जानकारी सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि दोनों ही पक्ष अपने अपने टॉप मिलिट्री और पॉलिटिकल लीडरशिप से मंत्रणा के बाद कोई बयान जारी करेंगे. लेकिन सूत्रों की मानें तो गोगरा और हॉट स्प्रिंग पर तो बात बन सकती है, लेकिन डेपसांग प्लेन पर मामला अटक सकता है. क्योंकि डेपसांग प्लेन का विवाद काफी पुराना है और वर्ष 2002 से लंबित है.
सूत्रों की मानें तो दोनों देशों के कोर कमांडर्स ने पहले चरण के डिसइंगेजमेंट पर तो संतोष जताया, लेकिन अभी दोनों देशों के बीच इस सेक्टर में भी डि-एसक्लेशन नहीं हुआ है. यानि डिसइंगेजमेंट के तहत सेनाएं पीछे तो हट गई हैं, लेकिन सैनिकों, टैंक, तोप, मिसाइल और दूसरे सैन्य साजो सामान में कमी नहीं आई है.
पूरा हुआ पैंगोंग-त्सो लेक के उत्तर और दक्षिण में डिसइंगेजमेंट
आपको बता दें कि पहले चरण में पैंगोंग-त्सो लेक के उत्तर और दक्षिण में डिसइंगेजमेंट पूरा हो चुका है. पहले चरण के डिसइंगेजमेंट में पैंगोंग त्सो के उत्तर में फिंगर एरिया में दोनों देशों की सेनाएं पीछे हट गई हैं. चीनी सेना ने फिंगर 4 से फिंगर 8 तक का पूरी इलाका खाली कर दिया है और अब सिरिजैप पोस्ट पर चली गई है. एलएसी के सबसे विवादित इलाके, फिंगर एरिया से चीनी सेना ने अपने सैनिकों और बंकर्स के साथ साथ मिसाइल बेस और तोपखाने को भी हटा लिया है.फिलहाल डिसइंगेजमेंट समझौते के तहत चीनी सेना को फिंगर 4 से फिंगर 8 तक का पूरा इलाका खाली करना था, और जितना भी डिफेंस-फोर्टिफिकेशन पिछले नौ महीने में किया था, वो सब तोड़ना था. भारतीय सेना भी फिंगर 4 से फिंगर 3 पर अपनी स्थायी चौकी, थनसिंह थापा पोस्ट पर चली गई है.
पैंगोंग-त्सो के दक्षिण छोर को खाली करेगी चीनी सेना
चीनी सेना ने पैंगोंग-त्सो के दक्षिण छोर से भी कैलाश हिल रेंज को खाली कर रही है. पैंगोंग-त्सो के दक्षिणी छोर से लेकर रेचिन ला दर्रे तक करीब 60 किलोमीटर के सभी इलाकों को दोनों देशों की सेनाओं को खाली करना है. क्योंकि यहां पर दोनों देशों की सेनाओं की एक दूसरे से मात्र 40-50 मीटर की दूरी थी. यहां पर दोनों देशों की आर्मर्ड और मैकेनाइज्ड फोर्सेज़ यानि टैंक, आईसीवी व्हीकल्स (बीएमपी इत्यादि) और हैवी-मशीनरी तैनात थी.
चीनी सेना के टैंक और दूसरे आर्मर्ड व्हीक्लस मोल्डो गैरिसन से कुछ दूरी पर रोहटगो बेस चले गए हैं, तो भारतीय सेना के टैंक, चुशुल ब्रिगेड हेडक्वार्टर और करीब ही लोमा और नियोमा तक पीछे हट गए हैं.
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