तीन तलाक: जानिए- अगर नया बिल कानून बना तो पत्नियों को मिलेंगे ये अधिकार
The Muslim Women (Protection of Rights on Marriage) Bill-2017: विधेयक के मुताबिक अब कोई भी पुरुष अपनी पत्नी को एक बार में तीन तलाक देता है तो उसे अमान्य माना जाएगा. कानूनी तौर पर पति-पत्नी का रिश्ता नहीं टूटेगा.
![तीन तलाक: जानिए- अगर नया बिल कानून बना तो पत्नियों को मिलेंगे ये अधिकार Triple Talaq: Know all things about The Muslim Women (Protection of Rights on Marriage) Bill-2017 तीन तलाक: जानिए- अगर नया बिल कानून बना तो पत्नियों को मिलेंगे ये अधिकार](https://static.abplive.com/wp-content/uploads/sites/2/2017/12/02121037/talaq-1493871211.jpg?impolicy=abp_cdn&imwidth=1200&height=675)
नई दिल्ली: तीन तलाक को लेकर लोकसभा में बिल पास हो गया है. अब ये बिल मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक-2017 यानि The Muslim Women (Protection of Rights on Marriage) Bill-2017 राज्यसभा में पेश किया जाएगा. अगर ये बिल राज्यसभा में बिना किसी बदलाव के पास हो जाता है तो मुस्लिम महिलाओं को कई अधिकार मिल जाएंगे.
इस बिल में क्या नया है और अगर नया बिल कानून बन जाता है तो महिलाओं को क्या मदद मिलेगी?
विधेयक के मुताबिक अब कोई भी पुरुष अपनी पत्नी को एक बार में तीन तलाक देता है तो उसे अमान्य माना जाएगा. कानूनी तौर पर पति-पत्नी का रिश्ता नहीं टूटेगा. चाहे पति ने तीन तलाक लिखकर, बोलकर या मैसेज के जरिए ही क्यों न दिए हों.
इसके साथ ही अब तीन तलाक देने वाले पुरुष को सजा और जुर्माना दोनों भुगतना होगा. तीन तलाक देने वाले पुरुष को तीन साल तक की सजा हो सकती है. पुलिस तलाक देने वाले पति को बिना वारंट गिरफ्तार भी कर सकती है.
गुजारा भत्ता: पत्नी अपने पति से अपने और अपने बच्चों के लिए गुजारा भत्ता मांग सकती है. गुजारा भत्ता कितना होगा, ये फर्स्ट क्लास मजिसट्रेट की अदालत में तय होगा.
नाबालिग बच्चे की कस्टडी: पत्नी अपने नाबालिग बच्चे की कस्टडी मांग सकती है. बच्चे की कस्टडी का फैसला मजिसट्रेट की अदालत में होगा.
महिलाओं के लिए क्या बदल जाएगा? अब तक महिलाओं को तलाक से सुरक्षा नहीं थी. पति जब चाहे बिना किसी कारण के एक झटके में पत्नी को तलाक दे सकता था और ऐसा करना कानूनन कोई जुर्म नहीं होता था. न जुर्माना, न जेल की सजा थी. न सामाजिक बायकॉट.
तलाक़ के बाद महिलाओं को गुजारा भत्ता भी नहीं मिलता था. कानून के मुताबिक सिर्फ तीन महीने तक यानि इद्दत की अवधि तक पति पर पत्नी के गुजारे भत्ता का भार होता था.
अब पति को गुजारा भत्ता देना होगा और कितना मिले इसका फैसला अदालत करेगी.
तलाक के बाद पत्नी को बच्चों की कस्टडी नहीं मिलती थी. बच्चों का मालिक पति होता था. अब कस्टडी को लेकर फैसला अदालत करेगी.
पेंच कहां है? The Muslim Women (Protection of Rights on Divorce) Act 1986 के तहत तलाक देने की सूरत में पति को तीन महीने के बाद गुजारा भत्ता नहीं देने की छूट थी. अब नए कानून से दो कानून में टकराहट होगी.
सवाल ये भी उठाया जा रहा है कि जब पति जेल में होगा तो गुजारा भत्ता कहां से देगा और कैसे देगा.
एक पेंच ये भी है कि इस कानून का ग़लत इस्तेमाल भी होगा. अगर पत्नी अपने पति से नाराज़ है और वो उसे फंसाना चाहती है तो तीन तलाक का झूठा आरोप लगा सकती है और ऐसी स्थिति में पति को जेल की हवा खानी पड़ सकती है.
![IOI](https://cdn.abplive.com/images/IOA-countdown.png)
ट्रेंडिंग न्यूज
टॉप हेडलाइंस
![ABP Premium](https://cdn.abplive.com/imagebank/metaverse-mid.png)
![रुमान हाशमी, वरिष्ठ पत्रकार](https://feeds.abplive.com/onecms/images/author/e4a9eaf90f4980de05631c081223bb0f.jpg?impolicy=abp_cdn&imwidth=70)