सुरंग में फंसे मजदूरों को बचाने के लिए तीन प्लान तैयार, वर्टिकल ड्रिलिंग जारी, जानें उठाए जा रहे कौन से कदम?
Uttarkashi Tunnel Collapse: सिलक्यारा सुरंग में फंसे मजदूरों को बाहर निकालने का काम जारी है और अब तक 30 मीटर तक वर्टिकल ड्रिलिंग हो गई है.
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Uttarkashi Tunnel Rescue: उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले स्थित सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को बाहर निकालने का अभियान 16 वें दिन भी जारी है. मजदूरों के बाहर निकालने के लिए पाइप बिछाने का काम अबतक पूरा नहीं हो सका है. ऐसे में अब पहाड़ी के ऊपर से वर्टिकल ड्रिलिंग की जा रही, जो लगभग 30 मीटर तक हो चुकी है.
हालांकि, वहां भी पानी निकलने की वजह से काम बंद हो गया है और अब मजदूरों को बाहर निकालने के लिए रैट माइनर्स को बुलाया गया है. इस बीच एनडीएमए के सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने न्यूज एजेंसी एएनआई से कहा, "ऑगर मशीन को फिर से इस्तेमाल करना कोई विकल्प नहीं है, क्योंकि ऑगर लगातार फंस रहा था और इसे निकालने की प्रक्रिया में काफी समय लग रहा था."
'बारिश की वजह से नहीं आएगी बाधा'
उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में जो भी मशीन इस्तेमाल की जा किया जा रहा है, वह थोड़ी धीमी है, लेकिन विश्वसनीय है. उन्होंने कहा, "मौसम विभाग ने उत्तराखंड में बारिश की संभावना जताई है और येलो अलर्ट जारी किया है, जिसका मतलब है कि हल्की बारिश हो सकती है. हालांकि, इसकी कोई संभावना नहीं है कि बारिश की वजह से रेस्क्यू के काम में कोई बाधा आए.
'वर्टिकल ड्रिलिंग जारी'
अता हसनैन वे कहा, "ऑगर मशीन का टूटा हुआ हिस्सा और मलबा सुरंग के सिल्क्यारा छोर से हटा दिया गया है. वर्टिकल ड्रिलिंग करने में हमने कल 15 मीटर तक खोदाई कर की थी. आज हम लगभग 30 मीटर पार कर चुके हैं. इसके अलावा बगल में लगभग 6-8 इंच की एक और वर्टिकल ड्रिलिंग की जा रही है, जो लगभग 76 मीटर तक पहुंच गई है."
उन्होंने बताया कि मजदूरों को बचाने के लिए रेस्क्यू का काम तीन जगहों से किया जा रहा है, जिनमें से टॉप-डाउन ड्रिलिंग और वर्टिकल ड्रिलिंग बिल्कुल विश्वसनीय हैं.
'लोगों को बचाने के लिए सभी संसाधन लाए गए'
एनडीएमए अधिकारी ने कहा, "इस प्रकार के ऑपरेशन में जब भूविज्ञान हमारे विरुद्ध हों और टेक्नोलॉजी नाकाम हो रही हो तो हम कोई अनुमान नहीं लगा सकते. हालांकि, हम लोगों को बाहर निकालने के लिए हर संभव संसाधन ला रहे हैं."
'प्रयासों में कोई कमी नहीं'
हसनैन ने बताया कि जब ऑगर मशीन खराब हो गई थी तो उसी रात पूरे देश में लेजर कटर, मैग्ना कटर का पता लगाने की कोशिश की गई और भारतीय वायु सेना की मदद से उन्हें तुरंत यहां लाया गया और काम शुरू किया गया. इससे पता चलता है कि हम अपने प्रयास में कोई कमी नहीं छोड़ रहे हैं.
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