प्रणब मुखर्जी: भारतीय शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई की गुणवत्ता पर दिया जाए ध्यान
पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि देश के शिक्षण संस्थानों में सुधार की जरूरत है. उन्होंने देश के विश्वविद्यालय से पढ़ाई करने वाले छात्रों को नोबेल नहीं मिलने पर दुख जताया. उन्होंने कहा कि शिक्षा की गुणवत्ता में स्कूल स्तर से सुधार की जरूरत है.
रांची: पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने शनिवार को इस बात पर अफसोस प्रकट किया कि देश की शिक्षण संस्थान प्रणाली में उपयुक्त माहौल नहीं है. उन्होंने शिक्षा के लिए बुनियादी ढांचे और गुणवत्ता दोनों विकसित करने का आह्वान किया. मुखर्जी ने तीन ग्रेजुएट का उल्लेख किया जो भारतीय विश्वविद्यालयों से पढ़कर निकले लेकिन विदेशों में काम करते हुए प्रतिष्ठित पुरस्कार हासिल किया.
पूर्व राष्ट्रपति ने कहा, ‘‘1930 के बाद से किसी भी भारतीय ने भारतीय विश्वविद्यालय में मूलभूत अनुसंधान पर काम करते हुए नोबेल पुरस्कार हासिल नहीं किया. सर सी वी रमन (नोबेल पुरस्कार जीतने वाले) ऐसे प्रथम और आखिरी (भारतीय) थे. ’’ उन्होंने कहा, ‘‘साथ ही साथ मैं जिक्र करता हूं कि तीन भारतीय ग्रेजुएट- कलकत्ता विश्वविद्यालय से अमर्त्यसेन, पंजाब विश्वविद्यालय से हरगोविंद खुराना और सुब्रमण्यम चंद्रशेखर ने नोबेल पुरस्कार प्राप्त किया.’’
पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने यह पुरस्कार प्राप्त तो किया लेकिन भारतीय विश्वविद्यालयों में काम करते हुए नहीं. उन्होंने कहा कि यह एक मूलभूत कमी को दर्शाता है कि देश में हमारी शिक्षण संस्थान प्रणाली में उपयुक्त माहौल नहीं है. उन्होंने यहां भारतीय प्रबंधन संस्थान के दसवें स्थापना दिवस कार्यक्रम में कहा, ‘‘दरअसल जिसकी जरुरत है, वह यह है कि हमारे यहां उच्च शिक्षा में बुनियादी ढांचों में भौतिक विस्तार ही नहीं हो, बल्कि शिक्षा की गुणवत्ता भी स्कूल से शुरू हो.’’
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