Governor Dhankhar Vs Mamata Banerjee: बंगाल में राज्यपाल की जगह CM ममता बनर्जी होंगी यूनिवर्सिटीज की चांसलर, कैबिनेट ने दी मंजूरी
WB State Universities Chancellor: बंगाल कैबिनेट ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को यूनिवर्सिटीज की चांसलर बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है.
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WB State Universities Chancellor: पश्चिम बंगाल कैबिनेट (Bengal Cabinet) ने राज्यपाल जगदीप धनखड़ (Jagdeep Dhankhar) की जगह मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) को राज्य के सभी सरकारी विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति (Chancellor) बनाने के प्रस्ताव को सोमवार को अपनी मंजूरी दे दी है. साथ ही राज्यपाल को निजी विश्वविद्यालयों के ‘विजिटर’ पद से हटाने और उनकी जगह राज्य के शिक्षा मंत्री को नियुक्त करने के एक अन्य प्रस्ताव को भी अपनी मंजूरी दी है. एक अधिकारी ने कहा कि कैबिनेट ने मुख्यमंत्री को कृषि और स्वास्थ्य विश्वविद्यालयों सहित सभी सरकारी विश्वविद्यालयों का कुलाधिपति बनाने के लिए अपनी सहमति दी है. ये प्रस्ताव 10 जून से शुरू हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र में विधेयक के रूप में पेश किया जाएगा.
इन प्रस्तावों को राज्य विधानसभा में विधेयकों के रूप में पारित किया जाना है जहां सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) बहुमत में है और इसके प्रभाव में आने से पहले राज्यपाल की सहमति भी लेनी होती है. बता दें कि, 26 मई को राज्य मंत्रिमंडल ने राज्यपाल धनखड़ को हटाने और ममता को उनकी जगह चांसलर बनाने का प्रस्ताव पारित किया था.
राज्य सरकार और राज्यपाल में चल रही खींचतान
विश्वविद्यालयों में कुलपतियों की नियुक्ति को लेकर राज्य सरकार और राज्यपाल जगदीप धनखड़ के बीच चल रही खींचतान के बाद ये कदम उठाया गया है. खबरों के मुताबिक, राज्यपाल धनखड़ ने पहले ये आरोप लगाया था कि राज्य सरकार ने उनकी सहमति के बिना कई कुलपति नियुक्त किए हैं.
तमिलनाडु में भी हुआ था कुछ ऐसा ही
गौरतलब है कि ऐसा ही कुछ पिछले महीने तमिलनाडु में भी हुआ था जहां एक विधेयक पारित किया था जिसमें राज्यपाल की जगह राज्य सरकार को विश्वविद्यालयों में कुलपति नियुक्त करने की शक्ति को संभालने का अधिकार दिया गया था. तमिलनाडु विश्वविद्यालय कानून (संशोधन) अधिनियम, 2022, और चेन्नई विश्वविद्यालय अधिनियम, 1923 (चेन्नई विश्वविद्यालय (संशोधन) अधिनियम, 2022) को 25 अप्रैल, 2022 को "चांसलर" की जगह "सरकार" के साथ पारित किया गया था. ये कदम तमिलनाडु (Tamil Nadu) में राज्यपाल (Governor) और एमके स्टालिन (MK Stalin) के नेतृत्व वाली द्रमुक सरकार के बीच राजनीतिक संघर्ष के रूप में भी देखा गया था.
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