BJP ने मोहन मांझी को ओडिशा का सीएम चुनकर एक तीर से लगाए दो निशाने, बड़े फैसले के पीछे ये रही वजह
Odisha New CM: बीजेपी के आदिवासी नेता और चार बार के विधायक मोहन चरण माझी को ओडिशा के नए मुख्यमंत्री को चुनने को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं कि ये फैसला झारखंड विधानसभा चुनाव को देखते हुए लिया गया है.
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Odisha New CM: बीजेपी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले कई सालों में चौंकाने वाले फैसले लेते रहे हैं. ऐसा ही निर्णय मंगलवार (11 जून) को ओडिशा को लेकर लिया गया. बीजेपी ने चार बार के विधायक मोहन चरण माझी को ओडिशा का नया मुख्यमंत्री चुना.
इसे चौंकाना वाला इसलिए माना जा रहा है क्योंकि राजनीतिक गलियारों में दूर-दूर तक मोहन चरण माझी का नाम नहीं आ रहा था. ऐसे में इसके पीछे के कारणों को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. मोहन चरण माझी को चुनकर बीजेपी ने एक तीर से दो निशाने लगाने की कोशिश की है. मोहन चरण माझी को चुनने के पीछे की सबसे बड़ी वजह झारखंड चुनाव और आदिवासी वर्ग के वोट साधना है.
झारखंड विधानसभा चुनाव से क्या कनेक्शन है?
आदिवासी वर्ग से आने वाले मोहन चरण माझी को बीजेपी ने ऐसे समय पर ओडिशा का मुख्यमंत्री बनाने का फैसला लिया है जब पार्टी को लोकसभा चुनाव में अपने दम पर बहुमत नहीं मिला है. साल 2014 के बाद पहली बार बीजेपी बहुमत के जादुई आकंड़े 272 को पार नहीं कर पाई और 240 सीटों पर अटक गई. इस कारण बीजेपी की निर्भरता राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में शामिल दलों पर बढ़ गई.
लोकसभा चुनाव में एनडीए ने झारखंड की 14 सीटों में 9 पर जीत दर्ज की. ये बीजेपी के लिए बड़ा झटका था क्योंकि एनडीए को 2019 के लोकसभा चुनाव में 12 सीटें हासिल हुई थी.
राज्य की अनुसूचित जनजाति (एसटी) के लिए आरक्षित सीटों पर बीजेपी की हार हुई है. सबसे चौंकाने वाला परिणाम खूंटी का रहा, जहां अर्जुन मुंडा को हार का सामना करना पड़ा और कांग्रेस के कालीचरण मुंडा ने जीत हासिल की.
वहीं, जेएमएम छोड़कर बीजेपी का दामन दामन थामने वाली शिबू सोरेन की बड़ी बहू सीता सोरेन की दुमका सीट पर हार हुई. चुनाव के ठीक पहले बीजेपी में आईं गीता कोड़ा को भी सिंहभूम सीट पर हार का सामना करना पड़ा. लोहरदगा लोकसभा सीट पर बड़ा उलटफेर करते हुए कांग्रेस के सुखदेव भगत ने बीजेपी के समीर उरांव को पराजित कर दिया.
इसने बीजेपी की अगुवाई वाले एनडीए नेतृत्व के माथे पर चिंता की लकीरें बढ़ा दी है. नाराजगी का सबसे बड़ा कारण झारखंड के आदिवासी नेता और पूर्व सीएम हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी को माना जा रहा है.
आदिवासी वोट पाना है कारण
झारखंड की मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल जनवरी 2025 के पहले हफ्ते में पूरा हो रहा है. ऐसे में इसी साल नवंबर और दिसंबर में चुनाव हो सकता है. माना जा रहा है कि बीजेपी ने नाराजगी दूर करने के लिए क्योंझर से चार बार के विधायक मोहन चरण माझी को चुना है.
न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक मोहन माझी जिस रायकला गांव से ताल्लुक रखते हैं वो भी आदिवासी बहुल है. वैसे कयास लगाए जा रहे थे कि मध्य प्रदेश में मोहन यादव को सीएम बनाने से बीजेपी को यूपी में फायदा होगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ, लेकिन पार्टी ने मध्य प्रदेश की सभी सीटों पर जीत हासिल की.
इनपुट भाषा से भी.
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