INS विक्रांत के समंदर में उतरने से क्यों घबराया हुआ है चीन, क्या हैं मायने? समझिए
INS Vikrant Power: INS विक्रांत के नौसेना में शामिल होने के बाद चीन सकपका गया है. भारत की बढ़ती ताकत देख चीन की बौखलाहट बाहर आ रही है और घबराया हुआ घूम रहा है.
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INS Vikrant: भारत (India) ने अपने पहला स्वदेशी एयरक्राफ्ट कैरियर आईएनएस विक्रांत (INS Vikrant) नौसेना (Indian Navy) को सौंप दिया है. इसके साथ ही नौसेना के पास अब दो जंगी जहाज हो गए हैं. आईएनएस विक्रांत के साथ आईएनएस विक्रमादित्य (INS Vikramaditya) भी भारत के पास है. आईएनएस विक्रांत के आने से भारत की ताकत हिंद महासागर (Indian Ocean) में बढ़ गई है. अब हिंद महासागर या हिंद-प्रशांत क्षेत्र में कहीं भी दुश्मन देश अब समुद्री व्यापार (Business) में न तो आसानी से रुकावटें पैदा कर सकेंगे और न ही अपने सैन्य मंसूबों को ही आगे बढ़ा पाएंगे.
कहने का मतलब ये है कि पिछले कुछ समय से चीन ने इन समुद्री इलाकों में अपनी गतिविधियां इतनी बढ़ा रखी हैं कि भारत ही नहीं, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया तक को इसकी चिंता रही है. अब भारत ने ठान लिया है कि ड्रैगन हो या पाकिस्तान, अब मनमानी के दिन चले गए हैं. नौसेना के वाइस चीफ वाइस एडमिरल एसएन घोरमाडे ने न्यूज एजेंसी को बताया कि INS विक्रांत के आने से हिंद-प्रशांत और हिंद महासागर में शांति और स्थिरता बढ़ेगी.
विदेशी मीडिया में आईएनएस विक्रांत की चमक
सीएनएन की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि आईएनएस विक्रांत ने भारत को "दुनिया की नौसैनिक शक्तियों की एक विशिष्ट लीग" में डाल दिया और एएफपी के एक लेख ने इसे "क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य मुखरता का मुकाबला करने के सरकारी प्रयासों में एक मील का पत्थर" बताया. समंदर में ताकत दिखाने के लिए एयरक्राफ्ट कैरियर सबसे अहम हथियारों में से एक है. यही वजह रही कि 10 साल में चीन ने तीन एयरक्राफ्ट कैरियर उतार दिए.
आईएनएस विक्रांत से जगी उम्मीद
पिछले काफी सालों से चीन हिंद महासागर और प्रशांत हिंद के इलाकों में तरह-तरह के हथकंडों से अपनी ताकत बढ़ा रहा है. श्रीलंका, पाकिस्तान जैसे देशों को कर्ज के जाल में फंसाकर वहां पीएलए का बेस तैयार करने में जुटा है. चीन की इन चालबाजियों की वजह से अंतरराष्ट्रीय कारोबार पर भी असर पड़ रहा है. तो वहीं, आईएनएस विक्रांत की वजह से हिंद प्रशांत क्षेत्र में भारत का दबदबा कायम होने की उम्मीद बढ़ गई है.
चीन की औकात नापने की तैयारी!
भारत ने आईएनएस विक्रांत के जरिए निकोबार द्वीप में अपनी ताकत बढ़ाकर चीन के सामने बहुत बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है. इसी द्वीप के पास से ही चीन का 70 प्रतिशत तेल गुजरता है और 60 प्रतिशत कारोबार भी होता है. आईएनएस विक्रांत के आने से भारत की नौसेना को बहुत बड़ी ताकत मिली है.
आईएनएस विक्रांत में क्या है खास?
आईएनएस विक्रांत (INS Vikrant) स्वदेशी युद्धपोत (Indian Aircraft Carrier) है. इस युद्धपोत को साल 2009 में बनाना शुरू किया गया था. इसका वजन 45 हजार टन है. इसकी लंबाई 262 मीटर और चौड़ाई 62 मीटर है. ये जहाज फुटबॉल के दो मैदान के बराबर है. पहले स्वदेशी युद्धपोत में 75 प्रतिशत स्वदेशी उपकरण लगे हैं. इस पर 450 किमी. की मारक क्षमता वाली ब्रह्मोस मिसाइल (Brahmos Missile) भी तैनात रहेगी. इसमें 2400 किमी. लंबी एक केबल भी लगी हुई है जो दिल्ली (Delhi) से कोच्चि (Kocchi) पहुंच सकती है. इस एयरक्राफ्ट कैरियर पर 30 एयरक्राफ्ट तैनात हो सकते हैं.
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