एक्सप्लोरर

MasterStroke में जानिए क्या है इलेक्टोरल बॉन्ड और क्यों मचा है राजनीतिक घमासान

इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम को 29 जनवरी 2018 को मोदी सरकार ने शुरू किया था. भारत का कोई भी नागरिक या कंपनी इस बॉन्ड को खरीद सकता है. कांग्रेस का आरोप है कि इसके जरिए भ्रष्टाचार हुआ है.

नई दिल्ली: देश की राजनीति में पिछले तीन दिनों से इलेक्टोरल यानी चुनावी बॉन्ड पर राजनीतिक घमासान मचा हुआ है. केन्द्र सरकार की तरफ से राजनीतिक पार्टियों को चंदा देने के लिए इलेक्टोरल बॉन्ड की ये स्कीम जनवरी 2018 में लाई गई थी. लेकिन कांग्रेस ने इस पर नवंबर 2019 में जाकर आपत्तियां उठाई हैं. इलेक्टोरल बॉन्ड और उससे उपजा ये पूरा विवाद आखिर क्या है?

इलेक्टोरल बॉन्ड पर अब प्रियंका गांधी ने सवाल उठाए. उन्होंने पूछा कि क्या प्रधानमंत्री ने कर्नाटक चुनाव के दौरान गैरक़ानूनी तरीक़े से बॉन्ड की बिक्री की अनुमति दी? इलेक्टोरल बॉन्ड पर आज कांग्रेस ने संसद भवन परिसर में प्रदर्शन किया. कल कांग्रेस ने संसद के दोनों सदनों में हंगामा किया था. कांग्रेस का आरोप है कि बॉन्ड से सरकारी भ्रष्टाचार को अमलीजामा पहनाया गया है. कांग्रेस ने भी आरोप लगाया कि बीजेपी के खजाने में कालाधन पहुंचाने के लिए चुनावी बॉन्ड लाया गया.

संजय राउत ने ABP न्यूज़ से कहा- उद्धव ठाकरे मुख्यमंत्री बनने के लिए तैयार हैं

ये पूरा मामला है क्या?

भारत में राजनीतिक दलों की फंडिंग को लेकर पारदर्शिता नहीं है. इन दलों को अपनी आय का ब्योरा सार्वजनिक करना होता है. विवाद इस बात पर नहीं है कि राजनीतिक पार्टियों को अपने कैंपेन के लिए पैसे की जरूरत होती है, लेकिन इस पर हमेशा से विवाद है कि इन राजनीतिक पार्टियों को चंदा किस रूप में मिलता है? परंपरागत रूप से भारत में चुनावों की फंडिंग कैश, चेक से होती है. लेकिन समस्या नकदी से मिलने वाले चंदे की थी, जिसका कोई स्रोत नहीं होता था, और इस पर हमेशा ये सवाल उठता था कि राजनीतिक पार्टियों को मिलने वाला चंदा कालाधन होता है. इसके बाद सरकार ने 2000 रुपये से ज्यादा के कैश चंदे पर रोक लगा दी. राजनीतिक दलों के चंदे में और ज्यादा पारदर्शिता लाने के लिए सरकार इलेक्टोरल बॉन्ड लेकर आई.

29 जनवरी 2018 को मोदी सरकार ने इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम शुरू की. प्रावधानों के मुताबिक जो भारत का नागरिक हो या जिसकी कंपनी भारत में हो, वो ये इलेक्टोरल बॉन्ड खरीद सकता है. पिछले लोकसभा या विधानसभा चुनाव में जिन भी रजिस्टर्ड पार्टियों को 1% वोट मिला हो, उन्हें इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए चंदा दिया जा सकता है. ये बॉन्ड सिर्फ स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ही जारी करता है. ये बॉन्ड 1,000, 10,000, 1 लाख, 10 लाख और 1 करोड़ रुपये के होते हैं. हर तिमाही के शुरुआती 10 दिनों में ये बॉन्ड खरीदे जा सकते हैं. लोकसभा चुनावों वाले साल में सरकार की तरफ से 30 दिनों का और वक्त दिया जाएगा.

गीता प्रेरणा महोत्सव में मोहन भागवत और योगी आदित्यनाथ समेत कई दिग्गज होंगे शामिल

इलेक्टोरल बॉन्ड पर दानदाता के नाम नहीं होगा. राजनीतिक पार्टियों को भी दानदाता बारे में पता नहीं चलेगा. लेकिन बैंक के पास सारी जानकारियां रहेंगी. बॉन्ड पर ना तो खरीदार को टैक्स देना होगा और ना ही राजनीतिक दल को टैक्स देना होगा.

अब हाल ही एक आरटीआई से ये पता चला कि जब इलेक्टोरल बॉन्ड लाने की प्रक्रिया चल रही थी, तो इन पर रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने आपत्ति की थी. सितंबर 2017 में RBI ने पत्र लिखकर कहा था कि इससे केन्द्रीय बैंक की साख को नुकसान पहुंचेगा और नोटबंदी से जो फायदा हुआ है, इन बॉन्ड्स से वो खत्म हो जाएगा. RBI ने ये भी कहा था कि इससे मनी लॉन्ड्रिंग बढ़ेगी. RBI की यही आपत्तियां कांग्रेस के विरोध का आधार हैं. कांग्रेस इसे घोटाला बता रही है और ब्लैक मनी को व्हाइट करने का तरीका बता रही है.

IIT खड़गपुर के रिसर्चर्स को गुजरात में मिले 3 हजार साल पुराने पाषाण युग के साक्ष्य

कुछ जरूरी आंकड़ें

मार्च 2018 से अक्टूबर 2019 तक 6,128 करोड़ रुपये के बॉन्ड बिके. लोकसभा चुनाव से दो महीने पहले यानी अप्रैल और मई में 3,622 करोड़ रुपये के बॉन्ड्स बिके. आरोप ये है कि इन बॉन्ड्स का सारा फायदा सिर्फ बीजेपी को मिल रहा है. क्योंकि 2018 मार्च में कुल 221 करोड़ रुपये का चंदा इलेक्टोरल बॉन्ड के माध्यम से राजनीतिक पार्टियों को दिया गया और इसमें से भी अकेले बीजेपी को 210 करोड़ रुपये का चंदा मिला. यानी करीब 95% चंदा बीजेपी को मिला. हालांकि इसके बाद का आंकड़ा नहीं आया है, जिससे ये पता चल सके कि किस पार्टी को चुनावी बॉन्ड से कितना चंदा मिला?

EIU की रिपोर्ट: युवाओं की आर्थिक असुरक्षा से तय होगी भारत की राजनीति

कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल ने कहा कि मोदी सरकार ने नियमों में ऐसे बदलाव किया कि जिसका सीधा फायदा उनकी पार्टी और सरकार को मिल रहा है अब जो बड़े कॉरपोरेट्स हैं उसमें से लगभग 95 फीसदी चंदा बीजेपी को मिल रहा है और उसी वजह से हाउदी मोदी ऐसे प्रोग्राम हो पा रहे हैं और चुनावों में पैसा खर्च हो रहा है. हालांकि एक सवाल ये भी है कि ये इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम पिछले करीब दो सालों से है तो कांग्रेस अब क्यों आपत्ति जता रही है?

यह भी देखें

और पढ़ें
Sponsored Links by Taboola

टॉप हेडलाइंस

US Israel Iran War Live: ईरान में नए सुप्रीम लीडर का चुनाव हुआ पूरा, जल्द हो सकता है नाम का एलान
Live: ईरान में नए सुप्रीम लीडर का चुनाव हुआ पूरा, जल्द हो सकता है नाम का एलान
Nepal Election Results Live: नेपाल में Gen-Z सरकार, बालेन शाह की आंधी में उड़े पूर्व PM ओली, वामपंथ का सुपड़ा साफ
Live: नेपाल में Gen-Z सरकार, बालेन शाह की आंधी में उड़े पूर्व PM ओली, वामपंथ का सुपड़ा साफ
Iran Earthquake: युद्ध के बीच ईरान में भूकंप के भयंकर झटके, रिक्टर पैमाने पर मापी गई 4.1 तीव्रता
युद्ध के बीच ईरान में भूकंप के भयंकर झटके, रिक्टर पैमाने पर मापी गई 4.1 तीव्रता
हैदराबाद में ED का बड़ा एक्शन, अनिल अंबानी से जुड़ी कंपनियों की जांच, शहर के कॉरपोरेट इलाकों में हड़कंप
हैदराबाद में ED का बड़ा एक्शन, अनिल अंबानी से जुड़ी कंपनियों की जांच, शहर के कॉरपोरेट इलाकों में हड़कंप

वीडियोज

Bollywood news: तलाक की खबरों के बीच थलापति विजय का नाम इस हसीना संग अफेयर में आया
Sansani: 'एपिक फ्यूरी' का जाल... अमेरिका कंगाल ? | Crime News | War
Chitra Tripathi: 'सरेंडर करे..', Donlad Trump ने ईरान को फिर दी धमकी | Breaking | Iran Israel War
Bharat Ki Baat: Iran- US टकराव के बीच भारत में तेल की कीमतों पर दबाव! | Trump | PM Modi | Breaking
Iran Israel War: ईरान से जंग को लेकर Trump की चाल खुद पर ही पड़ गई भारी? | Breaking | ABP News

फोटो गैलरी

Petrol Price Today
₹ 94.77 / litre
New Delhi
Diesel Price Today
₹ 87.67 / litre
New Delhi

Source: IOCL

पर्सनल कार्नर

टॉप आर्टिकल्स
टॉप रील्स
'कम बोलते थे, डेली रूटीन से करता था काम', मां ने बताया UPSC टॉपर अनुज अग्निहोत्री का संघर्ष
'कम बोलते थे, डेली रूटीन से करता था काम', मां ने बताया UPSC टॉपर अनुज अग्निहोत्री का संघर्ष
Pakistan Petrol Price: ईरान युद्ध के बीच पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की भारी कमी, आसमान छू रही कीमतें, जानें ताजा रेट
ईरान युद्ध के बीच पाकिस्तान में पेट्रोल-डीजल की भारी कमी, आसमान छू रही कीमतें, जानें ताजा रेट
IND vs NZ: फाइनल से पहले IND vs NZ के टी20 रिकॉर्ड, जानिए किस टीम ने बनाया सबसे बड़ा टोटल
फाइनल से पहले IND vs NZ के टी20 रिकॉर्ड, जानिए किस टीम ने बनाया सबसे बड़ा टोटल
Lucknow News: 'पहले इस्तेमाल करो, फिर बर्बाद करो...', नीतीश कुमार को लेकर BJP पर समाजवादी पार्टी ने कसा तंज
'पहले इस्तेमाल करो, फिर बर्बाद करो...', नीतीश कुमार को लेकर BJP पर समाजवादी पार्टी ने कसा तंज
Jana Nayagan Release: 'जन नायगन' 9 मार्च को सेंसर रिव्यू के लिए तैयार, इस तारीख को थिएटर में आ सकती है फिल्म
'जन नायगन' 9 मार्च को सेंसर रिव्यू के लिए तैयार, इस तारीख को थिएटर में आ सकती है फिल्म
आसमान में 2 दिनों तक दिखेगा अद्भुत खगोलीय नजारा, ब्रह्मांड में एक सीध में दिखेंगे 3 ग्रह शुक्र, शनि और वरुण
आसमान में 2 दिनों तक दिखेगा अद्भुत खगोलीय नजारा, ब्रह्मांड में एक सीध में दिखेंगे 3 ग्रह
Pregnancy In Space: क्या अंतरिक्ष में हो सकती है प्रेग्नेंसी, मां के पेट में बच्चे पर कितना पड़ेगा असर?
क्या अंतरिक्ष में हो सकती है प्रेग्नेंसी, मां के पेट में बच्चे पर कितना पड़ेगा असर?
पानीपत की बेटी श्रेया गुप्ता ने UPSC में पाई 114वीं रैंक, दूसरे प्रयास में हासिल की बड़ी सफलता
पानीपत की बेटी श्रेया गुप्ता ने UPSC में पाई 114वीं रैंक, दूसरे प्रयास में हासिल की बड़ी सफलता
Embed widget