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34 साल बाद भी सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों को नहीं मिला मुआवजा, केंद्र-राज्य सरकार से HC ने मांगा जवाब

अदालत को बताया गया कि करीब 34 साल बीत गए हैं, लेकिन इन याचिकाकर्ताओं को अभी तक अंतिम मुआवजा नहीं दिया गया है. इस मामले की सुनवाई एक महीने बाद की जाएगी.

प्रयागराज: वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों के पीड़ितों को मुआवजा नहीं दिए जाने के मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने बृहस्पतिवार को केंद्र और राज्य सरकार से एक महीने के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा. जज भारती सप्रू और जयंत बनर्जी की पीठ ने पीलीभीत के प्यारा सिंह और बरेली के हरपाल सिंह द्वारा दायर रिट याचिकाओं पर यह आदेश पारित किया.

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि 1984 के दंगों में प्यारा सिंह की पत्नी और बेटी एवं हरपाल सिंह के पिता की नृशंस हत्या कर दी गई थी. इस संबंध में FIR भी दर्ज की गयी थी और प्रत्येक मृतक के लिए 20,000 रुपये का अंतरिम मुआवजा दिया गया.

हालांकि, सरकार द्वारा पुनर्वास नीति के तहत घोषित अंतिम मुआवजे का अभी तक भुगतान नहीं किया गया है.

याचिकाकर्ताओं के वकील दिनेश राय ने कहा कि केंद्र सरकार जनवरी, 2006 में पुनर्वास नीति लेकर आई जिसके तहत मृतक व्यक्ति के आश्रित को 3.5 लाख रुपये और घायलों को 1.25 लाख रुपये मुआवजा दिए जाने का निर्णय किया गया.

फरवरी, 2015 में इस मुआवजे की राशि बढ़ाकर 8.5 लाख रुपये कर दी गई. अदालत को बताया गया कि करीब 34 साल बीत गए हैं, लेकिन इन याचिकाकर्ताओं को अभी तक अंतिम मुआवजा नहीं दिया गया है. इस मामले की सुनवाई एक महीने बाद की जाएगी.

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