डिप्टी सीएम के जिले में घुटने भर पानी में चलकर स्कूल जाने को मजबूर हैं बच्चे
इलाहाबाद में इन दिनों चारों तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है. बारिश का सबसे बुरा असर स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है. शहर के प्राइवेट स्कूलों में तो बारिश और जलभराव के ठीक-ठाक इंतजाम हैं, पर दूर-दराज के गांवों के सरकारी प्राइमरी स्कूलों का हाल काफी बुरा है.
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इलाहाबाद: संगम के शहर इलाहाबाद में पिछले एक हफ्ते से लगातार हो रही बारिश ने जहां उमस भरी गर्मी से जूझ रहे लोगों को काफी राहत पहुंचाई है, वहीं जगह-जगह हुए जलभराव से लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. सबसे ज़्यादा दिक्कत स्कूली बच्चों को हो रही है. कहीं स्कूल कैम्पस में ही पानी भर गया है तो कहीं रास्तों पर जलभराव होने से बच्चों को घुटने भर पानी में घुसकर पढ़ाई करने के लिए जाना होता है. लगातार हो रही बारिश और जलभराव से परेशान बच्चे अब स्कूल बंद किए जाने की गुहार लगा रहे हैं.
इलाहाबाद में इन दिनों चारों तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है. बारिश का सबसे बुरा असर स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है. शहर के प्राइवेट स्कूलों में तो बारिश और जलभराव के ठीक-ठाक इंतजाम हैं, पर दूर-दराज के गांवों के सरकारी प्राइमरी स्कूलों का हाल काफी बुरा है. फूलपुर इलाके के इंग्लिश मीडियम के सरकारी प्राइमरी स्कूल में पिछले एक हफ्ते से पानी भरा हुआ है. स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे बारिश के जमा पानी के बीच ही कैंपस में दाखिल होते हैं और क्लास में जाते हैं. बारिश ज़्यादा होने पर इन्हे कुछ देर क्लासरूम में रूककर पानी कम होने का इंतजार भी करना पड़ता है.
इलाहाबाद-वाराणसी हाइवे पर हंडिया इलाके में बलीपुर रोड पर तो पिछले कई दिनों से सड़क पर घुटने भर पानी भरा हुआ है. इस रास्ते पर कई प्राइमरी व माध्यमिक स्कूल पड़ते हैं. इन स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को सड़क पर जमा घुटने भर पानी के बीच से ही रोज़ाना स्कूल आना और जाना पड़ रहा है. सड़क पर कई जगह गड्ढे होने से कई छात्र गिरकर चोटिल भी हो चुके हैं. यहां के स्कूलों में पढ़ने वाले तमाम छात्र तो कपडे लेकर स्कूल आते हैं और भीगे हुए कपड़ों को स्कूल में बदलकर उन्हें सुखाते हैं.
ये दो मामले तो बानगी भर हैं. इलाहाबाद में ग्रामीण इलाकों के तमाम स्कूलों और उनके बाहर के रास्तों का यही हाल है. इन जगहों पर बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर पढ़ाई के लिए जाते हैं. यह सब ज़िम्मेदार लोगों की जानकारी में है, लेकिन वह जानते हुए भी इस सच से आंख मूंदे रहते हैं.ऐसा शायद इसलिए क्योंकि उनके अपने बच्चे सरकारी स्कूलों में नहीं पढ़ते हैं. यह मामला और भी शर्मनाक इसलिए है क्योंकि इलाहाबाद यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का गृह जनपद है.
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