यूपी बोर्ड के रिजल्ट में हेराफेरी के लगे आरोप, सोशल मीडिया पर वायरल हुई मार्कशीट्स
योगीराज में हुए यूपी बोर्ड के पहले इम्तिहान के नतीजे सवालों के घेरे में हैं. बिहार के रिजल्ट की तरह यूपी बोर्ड के नतीजों में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप लग रहे हैं.
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इलाहाबाद: योगीराज में हुए यूपी बोर्ड के पहले इम्तहान के नतीजे सवालों के घेरे में हैं. बिहार के रिजल्ट की तरह यूपी बोर्ड के नतीजों में भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के आरोप लग रहे हैं. आरोप है कि बोर्ड ने कापियों में सिर्फ दो और तीन नंबर पाने वाले लाखों स्टूडेंट्स की मार्कशीट पर कई गुना ज़्यादा नंबर चढ़ाकर उन्हें पास घोषित कर दिया है. आरोप है कि योगी सरकार ने सियासी फायदे के लिए लाखों स्टूडेंट्स पर नंबरों की कृपा बरसाई है.
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं दस्तावेज
कापियों पर दिए गए मार्क्स और मार्कशीट पर उसे बढ़ाकर कई गुना ज़्यादा किए जाने के तमाम दस्तावेज सोशल मीडिया पर खूब वायरल भी हो रहे हैं. इस बारे में इलाहाबाद में यूपी बोर्ड के हेडक्वार्टर के अफसर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं और वह मीडिया के सामने कोई बयान देने या अपना पक्ष रखने के बजाय भाग रहे हैं.
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ऐसे में यह सवाल उठाना लाजिमी है कि अगर कुछ गड़बड़ नहीं है तो बोर्ड के अधिकारी सामने आकर अपना पक्ष क्यों नहीं रख रहे हैं. बोर्ड के अफसरों का भागना इस शक को और पुख्ता करता है कि दाल में कहीं कुछ काला जरूर है.
दरअसल सोशल मीडिया पर जो मैसेज वायरल हो रहा है, वह न सिर्फ बेहद चौकाने वाला है, बल्कि यूपी बोर्ड की ईमानदारी और पारदर्शिता पर भी सवाल उठाने वाला है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे दस्तावेज में ये दावा किया गया है कि कई बच्चों को कापियों में सिर्फ दो या तीन नंबर ही मिले. इस आधार पर उन्हें उस सब्जेक्ट या पेपर में फेल रहना चाहिए था लेकिन वह पास हो गए हैं.
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कापियों पर दिए गए जो नंबर एवार्ड शीट पर चढ़ाए गए थे, मार्कशीट पर चढ़े नंबर उससे काफी अलग थे और उस रोल नंबर को पास दिखाया गया है. एवार्ड शीट के नंबरों को ही मार्कशीट पर चढ़ाया जाता है. सोशल मीडिया पर एक-दो नहीं बल्कि सैकड़ों स्टूडेंट्स की एवार्ड शीट और मार्कशीट को वायरल कर बोर्ड इम्तहान में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी के दावे किए जा रहे हैं.
एवार्ड शीट और मार्कशीट के नंबरों में है अंतर
सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे छात्रों की डिटेल वायरल की जा रही है. इनमें बताया जा रहा है कि इन छात्रों को कई गुना ज़्यादा नंबर दिए गए हैं और फेल होने के बजाय मार्कशीट में वह पास दिख रहे हैं. सोशल मीडिया पर इस तरह की मिसालों की भरमार है. आरोप लगाया गया है कि यह सभी स्टूडेंट फेल होने चाहिए थे, लेकिन बोर्ड की मेहरबानी की वजह से अब यह अच्छे नंबरों से पास हैं.
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मॉडरेशन स्कीम में अधिकतम आठ नंबर बढ़ाए जा सकते हैं
हालांकि कुछ साल पहले यूपी बोर्ड ने मॉडरेशन स्कीम शुरू की थी. इसके तहत अगर कोई छात्र फेल हो रहा है तो उसे ग्रेस मार्क की तरह कुछ नंबर देकर पास कर दिया जाता है. हालांकि बोर्ड ने गोपनीयता के नाम पर कभी इस स्कीम का डिटेल्स सार्वजनिक नहीं किया.
यूपी बोर्ड के नतीजों की जांच स्वतंत्र एजेंसी से कराए जाने की मांग
इस बारे में बोर्ड के ज़िम्मेदार अफसर वायरल मैसेज पर कोई बात करना नहीं चाह रहे हैं. रिजल्ट घोषित होने के बाद से ज़्यादातर अधिकारी दफ्तर में ही नहीं बैठ रहे हैं. यूपी बोर्ड की सचिव नीना श्रीवास्तव से बृहस्पतिवार की शाम को उनके दफ्तर जाकर इस मामले में पक्ष जानने की कोशिश की गई तो उन्होंने कुछ भी बोलने से मना कर दिया.
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