मेरठ: मेरठ पुलिस ने सरधना इलाके में बड़े पैमाने पर तमंचे बनाने वाली अवैध हथियारों की फैक्ट्री का खुलासा किया है. पुलिस की नजरों से दूर यह फैक्ट्री एक बाग में बनाए गए कमरे में संचालित की जा रही थी. पुलिस ने छापे में अवैध हथियार बनाने के उपकरण और सैकड़ों की तादात में बने और अधबने तमंचे बरामद किए है.
इतनी बड़ी फैक्ट्री देखकर उड़ गये पुलिस के होश
पुलिस को अवैध असलहे की फैक्ट्री का सुराग मुखबिर से लगा और पुलिस टीम ने भामौरी गांव के एक बाग में चल रही इस फैक्ट्री पर छापा मारा. छापे के दौरान फरमान, दिनेश ठाकुर, अमित गिरी, एहसान, नसीम और इनाम मौके पर गिरफ्तार किए गए. पुलिस ने तमाम बोर के बने और अधबने सैकड़ों तमंचे बरामद किए. साथ ही तमंचे बनाने के लिए इस्तंमाल होने वाले औजारों में ड्रिलमशीन, हथौड़ी, नाल, लोहे की लकड़ी, पेंचकस, छैना और प्लास समेत बहुत से कलपुर्जे बरामद किए हैं. आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि कई साल से चल रहे इस धंधे के वह होलसेलर है. उन्हें 50 से 200 तमंचे तक बनाने के आर्डर मिला करते थे और ऐजेन्टों के जरिए आसानी से इन्हें वेस्ट यूपी के अलावा एनसीआर के जिलों तक खपाया जाता था.
तो चुनाव 2019 से पहले निशाने पर थी कांवड़ यात्रा
पुलिस ने बताया कि तमंचो का बड़े पैमाने पर निर्माण 2019 के चुनाव में इनके इस्तेमाल के मद्देनजर किया जा रहा था. मगर हाल ही में कांवड़ यात्रा में गड़बड़ी फैलाने के मंसूबे के लिए इनके इस्तेमाल से भी इंकार नहीं किया जा सकता. फिलहाल, मेरठ, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर में तमंचों की मांग बढ़ी है और हर दिन एक दर्जन तमंचों की निर्माण किय़ा जा रहा था. इनाम के अलावा गिरफ्तार बाकी सभी आरोपी पुराने अपराधी है.
वेस्ट यूपी में फैशन बन रहा है तमंचे का इस्तेमाल
पुलिस की मानें तो वेस्ट यूपी में तमंचों के इस्तैमाल की प्रचलन बीते सालों में तेजी से बढ़ा है. कॉलेज जाने वाले लड़के फैशन के तौर पर तमंचों को अपने साथ लेकर चलते हैं. इन तमंचों की कीमत एक से डेढ़ हजार रुपए होती है इसलिए इसे खरीदना भी मंहगा सौदा नहीं है. सूप्रीम कोर्ट के आदेश पर यूपी में शस्त्र लाइसेंस के लिए बढ़ी औपचारिकताएं भी तमंचे के प्रचलन को बढ़ा रही हैं. अब आमतौर पर शस्त्र लाइसेंस हासिल करना बेहद मुश्किल है.