राम मंदिर निर्माण: उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य बोले- जल्द ख़त्म हो सकता है राम भक्तों का इंतजार
अयोध्या जमीन विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में रोजाना सुनवाई चल रही है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं. ऐसे में इस मामले पर फैसला जल्द आ सकता है. कोर्ट वकीलों से 17 अक्टूबर से पहले अपनी बहस पूरी करने को कहा है.
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कौशांबी: उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ के राम मंदिर निर्माण को लेकर संकेत के बाद अब उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य राम मंदिर निर्माण को लेकर बड़ा बयान दिया है. डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने कहा कि सीएम योगी ने जो कहा है, उसके संकेत माननीय सुप्रीम कोर्ट दे चुका है. 17 अक्टूबर को सुनवाई पूरी हो रही है और उसके अगले महीने श्रीराम लला मंदिर निर्माण सम्बंधित फैसला आने वाला है. राम लला का भव्य मंदिर जिसकी हर राम भक्त प्रतीक्षा कर रहा है- वह समाप्त होने वाला है, ऐसी वह आशा करते हैं.
उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य अपने स्वर्गवासी पिता श्याम लाल मौर्य की पहली पुण्य तिथि पर सिराथू पहुंचे थे. जहा उन्होंने प्रशासनिक अफसरों के साथ बैठक कर विकास, कानून व्यवस्था जैसे कई महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर चर्चा की. डिप्टी सीएम ने कार्यक्रम में जनता से रूबरू होते हुए सिराथू विधानसभा में सड़क और सेतु की तकरीबन 160 करोड़ की परियोजनाओं का शिलान्यास किया.
डिप्टी सीएम के मुताबिक उनका मानना है कि जब हम सड़क और सेतु से संपन्न होंगे तब हमारा जनपद प्रदेश और देश भी संपन्न होगा. तभी पलायन रुकेगा और गांव के लोगों को गांव में रोजगार मिलेगा.
योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा था गोरखपुर में आयोजित मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अप्रत्यक्ष रूप से अयोध्या में भव्य श्री राम मंदिर के निर्माण का संकेत देते हुए कहा कि जल्द ही लोगों को अच्छी खुशखबरी सुनने को मिलेगी.
17 नवंबर से पहले फैसला सुना सकता है सुप्रीम कोर्ट
बता दें कि अयोध्या जमीन विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट में रोजाना सुनवाई चल रही है. 17 नवंबर से पहले फैसला सुना सकता है. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा है कि सभी पक्ष अपनी-अपनी दलीलें 17 अक्टूबर से पहले पूरे कर लें. इसके बाद इस मामले पर सुनवाई नहीं होगी. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं.
इलाहबाद हाई कोर्ट ने का क्या फैसला था?
इलाहबाद हाई कोर्ट ने 2010 के अपने आदेश में 2.77 एकड़ के इस विवादास्पद भूमि को राम लला, निर्मोही अखाड़ा और सुन्नी वक्फ बोर्ड में बराबर-बराबर बांट दिया था.
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