लखनऊ: यूपी में चुनाव से पहले अखिलेश और राहुल की दोस्ती हो गई है. कई दिनों से चला आ रहा सस्पेंस कल खत्म हुआ और कल समाजवादी पार्टी और कांग्रेस में गठबंधन हो गया. अब सवाल ये है कि इस गठबंधन से किसको फायदा होगा और किसको नुकसान ?


साइकिल को मिला हाथ का सहारा


कहते हैं कि जब साइकिल चढ़ाई पर फंस जाए तो पीछे से हाथ लगाकर धक्का देने पर चढ़ाई आसान हो जाती है.  कुछ ऐसा ही माहौल इस बार यूपी के चुनाव में भी है. अखिलेश को दोबारा सत्ता पानी है, लेकिन राह मुश्किल है.  इसलिए, इसे आसान बनाने के लिए अखिलेश ने कांग्रेस का हाथ का दामन थामा है. हाथ के सहारे यूपी में फिर से उनकी साइकिल दौड़ पड़े इसकी कोशिशें हैं. कई दिनों तक कभी हां कभी ना के बीच कल गठबंधन का एलान हो गया.


एसपी 298, कांग्रेस 105 सीटों पर लड़ेगी


समझौते के मुताबिक, समाजवादी पार्टी 298 सीटों पर और कांग्रेस 105 सीटों पर चुनाव लड़ेगी. गठबंधन तो हो गया लेकिन इससे किसे होगा फायदा और किसे नुकसान ? इस सवाल के जवाब के लिए यूपी में पिछली बार दो हजार बारह के चुनाव के आंकड़े समझना जरूरी है.


2012 के चुनाव में क्या हुआ था?


पिछली बार के चुनाव में समाजवादी पार्टी को 29 फीसद वोट मिले थे, वहीं कांग्रेस को 11 फीसद वोट मिले थे, अगर दोनों को मिला दें तो कुल 40 फीसद वोट होते हैं. अगर सीटों के हिसाब से देखें तो पिछली बार समाजवादी पार्टी को 224 और कांग्रेस को 28 सीटें मिली थीं. अगर दोनों को जोड़ दें तो कुल 252 सीटें होती हैं.


अब चूंकि इस बार समाजवादी पार्टी के लिए हालात पिछले के मुकाबले कमज़ोर लग रहे हैं, इसीलिए अखिलेश को लगता है कि कांग्रेस के हाथ के सहारे इस बार उनकी नैया पार लग जाएगी. हालांकि, विरोधी कह रहे हैं कि गठबंधन से बात नहीं बनने वाली.


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