सिडनी: ऑस्ट्रेलिया में नौ साल की एक स्कूली लड़की ने राष्ट्रगान के दौरान खड़े होने से इनकार कर दिया जिसे लेकर देश में बहस का दौर शुरू हो गया है. लड़की का कहना है कि उसने कथित संस्थागत नस्लवाद का विरोध करने के लिए यह कदम उठाया. हार्पर नेल्सन नाम की ये छात्र पिछले सप्ताह अपनी क्लास में राष्ट्रगान के दौरान खड़ी नहीं हुई थी. उसका आरोप है कि ‘एडवांस ऑस्ट्रेलिया फेयर’ देश के मूल लोगों की उपेक्षा करता है.
‘एडवांस ऑस्ट्रेलिया फेयर’ देश के राष्ट्रगान का हिस्सा है. लड़की के मुताबिक ये देश के मूलनिवासियों के खिलाफ भेदभाव करने वाला लगता है. ऑस्ट्रेलियाई मीडिया एबीसी से बात करते हुए बच्ची ने कहा कि राष्ट्रगान के समय जब 'वी आर यंग' की लाइन आती है तो ये उन लोगों का अपमान करती है जो सबसे पहले यहां के मूल निवासी थे. लड़की को पिछले हफ्ते अपनी क्लासमेट के साथ राष्ट्रगान में हिस्सा नहीं लेने के लिए सज़ा भी दी गई थी.
वहीं लड़की के इस कदम पर राजनीति तेज़ हो गई है और देश के दक्षिणपंथी यानी राइट विंग के नेताओं ने नौ साल की इस बच्ची के बारे में बेहद आपत्तिजनक और भद्दी बातें कही हैं. ऐसे ही एक बयान में एक नेता ने कहा है कि लड़की का दिमाग साफ कर दिया गया है. उन्होंने आगे कहा कि बच्ची को लात मारने में उन्हें कोई संकोच नहीं होगा.
क्या है रंगभेद
आपको बता दें कि भारत में जाति और धर्म की जैसी समस्या है वैसी ही समस्या पश्चिमी देशों और ऑस्ट्रेलिया में नस्ल की है. नस्ल आधारित भेदभाव में रंग शामिल होता है. इसमें कई ऐसे देश है जहां के लोग अफ्रीका से आए लोगों के खिलाफ उनकी रंग की वजह से भेदभाव करते हैं. हाल ही में अमेरिका में भी ऐसा ही एक मामला सामने आया जो पूरी दुनिया के लिए मिसाल बन गया.
अमेरिका में भी राष्ट्रगान पर नहीं खड़े हुए खिलाड़ी
एक मैच के दौरान फुटबॉल खिलाड़ी केपरनिक और एनएफ़एल (नेशनल फ़ुटबॉल लीग) के खिलाड़ियों ने राष्ट्रगान के दौरान खड़े न होकर एक नई बहस को जन्म दे दिया. उनके बाद कई और खिलाड़ियों ने भी उन्हीं की तरह राष्ट्रगान के दौरान खड़े होने के बजाए घुटनों के बल बैठकर विरोध प्रकट किया.
केपरनिक और एनएफ़एल के बाकी के खिलाड़ियों का ये विरोध अमेरिकी पुलिस के हाथों कई अफ्रीकन-अमेरिकन लोगों की मौत और उसके बदले में की गई कार्रवाई में हुई हत्याओं को लेकर अमरीका में नस्लीय भेदभाव के ख़िलाफ़ था.
केपरनिक का कहना था कि वो तब तक राष्ट्रगान में शामिल नहीं होंगे जब तक अमरीका में नस्लीय रिश्ते बेहतर नहीं होंगे. इसके बाद उनके इस विरोध को लेकर काफी बहस हुई. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी केपरनिक के इस कदम को गलत ठहराया था.
अपने विरोध प्रदर्शन के बाद केपेरनिक को 2017 सीज़न के लिए टीम में जगह नहीं मिली. जिसके बाद उन्होंने नेशनल फुटबॉल लीग पर मुकदमा चलाया. नाइकी ने 2011 से ही केपर्निक को प्रायोजित किया है और कहा है कि वो अपने 'जस्ट डू इट' कैंपेन की 30वीं वर्षगांठ पर एक कैंपेन के लिए कई चेहरे में से एक होंगे.
नाइकी को करना पड़ा विरोध का सामना
स्पोर्ट्स वियर बनाने वाली कंपनी नाइकी को सोशल मीडिया पर भारी विरोध का सामना करना पड़ा है. कंपनी को अमेरिका के लोगों के गुस्से का सामना इसलिए करना पड़ है क्योंकि इसने केपरनिक को अपना ब्रांड एंबेसडर बनाया है. जैसा कि हम आपको बता चुके हैं कि केपरनिक वो खिलाड़ी हैं जिन्होंने अमेरिका में जारी नस्लभेद के खिलाफ भारी विरोध जताया था.
विरोध जताते हुए एक बार वो राष्ट्रगान के दौरान घुटनों पर बैठ गए थे. उन्हें ब्रांड एंबेस्डर बनाए जाने के नाइकी के इस फैसले ने एक बार फिर पूरे अमेरिका में राष्ट्रवाद को लेकर एक नई बहस को छेड़ दी है.
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