China and Nepal Relation: चीन बेशक भारत को घेरने के लिए उसके पड़ोसी देशों से अच्छे संबंध रखता हो, उन देशों में अपने इन्फ्रास्ट्रक्चर खड़े रखता हो, लेकिन पिछले कुछ साल से उसे निराशा ही मिल रही है. फिर चाहे श्रीलंका हो या नेपाल. हर जगह उसका प्लान चौपट हो रहा है. हाल ही में नेपाल के प्रधानमंत्री पुष्‍प कमल दहल प्रचंड चीन के दौरे पर थे. इस दौरान उन्होंने कई समझौते किए, लेकिन दोनों देशों में पहले जैसी दोस्ती नहीं दिखी.


पुष्प कमल दहल प्रचंड ने रविवार को नेपाल की संसद में कहा कि चीन के नेताओं के साथ हाल ही में हुई उनकी मुलाकात के दौरान ट्रांसमिशन लाइन बनाने, बॉर्डर पर सोलर पावर प्‍लांट लगाने, सड़कें और स्‍वास्‍थ्‍य जैसे क्षेत्रों में विस्‍तार पर सहमति बनी. पर प्रचंड के इन दावों का धरातल से कोई लेनादेना नहीं है. इससे पहले भी दोनों देशों ने कई प्रोजेक्ट को लेकर सहमति जताई थी, लेकिन वास्तव में नेपाल के अंदर चीन के सभी प्रोजेक्‍ट कागजों तक सीमित हैं.


बेहतर हो रहे हैं नेपाल और भारत के रिश्ते


वहीं दूसरी ओर भारत और नेपाल के संबंध पहले से बेहतर होते जा रहे हैं. नेपाल के अंदर भारत के कई प्रोजेक्ट्स पर तेजी से काम चल रहा है. बता दें कि नेपाल को भारत से कुल 63 अरब डॉलर की आर्थिक सहायता मिली है. ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, नेपाल के पीएम को पिछली चीन यात्रा के दौरान महज 12 प्रोजेक्‍ट के लिए फंडिंग का भरोसा मिला है.


भारत के प्रोजेक्ट पर तेजी से चल रहा काम


भारत ने साल 2018 में कई प्रोजेक्ट शुरू किए थे. इनमें से अधिकतर पूरे हो चुके हैं. बात चाहे सीमा चेक पोस्‍ट की हो या फिर स्वास्थ्य सुविधाओं से जुड़े प्रोजेक्ट की, भारत ने सभी में सफलता हासिल की है. भारत नेपाल को जल्द ही रोड-रेल से भी लिंक कर लेगा. भारत ने नेपाल को 22 प्रॉजेक्‍ट के लिए 1.65 अरब डॉलर दिए थे.


ये हैं नेपाल में भारत के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट


नेपाल में भारत के महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट की बात करें तो इनमें बीरगंज और बिराटनगर, मोतिहारी-अमलेखगुंज पेट्रोलियम प्रोडक्‍ट पाइपलाइन, तराई रोड प्रोजेक्‍ट, जयनगर-कुर्था-बिजलपुर रेल लिंक आदि शामिल हैं.


चीन का बीआरआई प्रोजेक्ट अभी तक नहीं हुआ शुरू


अब बात चीन की करें, तो नेपाल में चीन के प्रोजेक्ट की स्थिति अच्छी नहीं है. चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का ड्रीम प्रोजेक्ट बेल्‍ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) पर यहां अभी तक काम भी शुरू नहीं हुआ है, जबकि इसे लेकर दोनों देशों के बीच 2017 में ही समझौता हुआ ता. नेपाल के विदेश मंत्री भी बीआरआई पर काम शुरू न हो पाने की बात कह चुके हैं. चीन इस प्रोजेक्ट के लिए नेपाल पर लगातार दबाव बना रहा है, लेकिन अभी तक इसे शुरू न हो पाने की वजह भी पता नहीं चली है.


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