India Bangladesh Rift: भारत ने गुरुवार को 90 बांग्लादेशी मछुआरों को रिहा करने का फैसला लिया. विदेश मंत्रालय की ओर से एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया गया कि भारत ने 90 बांग्लादेशी मछुआरों को रिहा करने का फैसला लिया है. यह कदम भारत और बांग्लादेश के बीच मछुआरों की आपसी रिहाई और प्रत्यर्पण प्रक्रिया का हिस्सा है.
मंत्रालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि हाल के महीनों में कई भारतीय मछुआरों को बांग्लादेशी अधिकारियों द्वारा गिरफ्तार किया गया था, जब वह गलती से अंतर्राष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा को पार कर बांग्लादेशी जलक्षेत्र में चले गए थे. इसी तरह, कई बांग्लादेशी मछुआरों को भी भारतीय अधिकारियों द्वारा इसी कारण गिरफ्तार किया गया है. भारत सरकार भारतीय मछुआरों की सुरक्षा, कल्याण और भलाई को सर्वोच्च महत्व देती है और इस संबंध में सरकार ने बांग्लादेशी हिरासत से भारतीय मछुआरों की रिहाई सुनिश्चित करने के लिए कड़ी मेहनत की है.
विज्ञप्ति में आगे बताया गया कि गुरुवार को 95 भारतीय मछुआरों को बांग्लादेशी अधिकारियों द्वारा बांग्लादेश कोस्ट गार्ड को सौंप दिया गया है, जो 5 जनवरी 2025 को भारतीय कोस्ट गार्ड को सौंपेंगे. इसी दिन, 90 बांग्लादेशी मछुआरों को भी एक आपसी रिहाई और प्रत्यर्पण अभियान के तहत समुद्र में भारतीय और बांग्लादेशी कोस्ट गार्ड अधिकारियों द्वारा रिहा किया जाएगा.
मछुआरों और उनके जहाजों के पारस्परिक आदान-प्रदान को दोनों पक्षों के मछली पकड़ने वाले समुदायों की मुख्य रूप से मानवीय और आजीविका संबंधी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है.
बांग्लादेश ने बदला 'इतिहास'
बांग्लादेश में नयी पाठ्यपुस्तकें पेश की गई हैं, जिनमें बताया गया है कि जियाउर रहमान ने 1971 में देश की आजादी की घोषणा की थी जबकि अब तक की पुस्तकों में इसका श्रेय बंगबंधु शेख मुजीबुर्रहमान को दिया जाता रहा है. मीडिया में आई एक खबर में यह जानकारी दी गई है.
‘डेली स्टार’ समाचार पत्र की खबर में कहा गया है कि प्राथमिक और माध्यमिक छात्रों की नयी पाठ्यपुस्तकों में कई बदलाव किए गए हैं. पाठ्यपुस्तकों में मुजीबुर्रहमान के लिए 'राष्ट्रपिता' की उपाधि भी हटा दी गई है.
खबर में राष्ट्रीय पाठ्यक्रम एवं पाठ्यपुस्तक बोर्ड के अध्यक्ष प्रोफेसर ए.के.एम. रियाजुल हसन के हवाले से कहा गया है कि शैक्षणिक वर्ष 2025 के लिए नयी पाठ्यपुस्तकों में उल्लेख होगा कि “26 मार्च 1971 को जियाउर रहमान ने बांग्लादेश की स्वतंत्रता की घोषणा की थी और 27 मार्च को उन्होंने बंगबंधु की ओर से स्वतंत्रता का एक और ऐलान किया.”