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दोस्ती में बदलने जा रही है ऐतिहासिक दुश्मनी- पढ़ें, नॉर्थ और साउथ कोरिया के बीच 70 सालों तक चले युद्ध की पूरी कहानी

उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन के बीच आज जो मुलाकात हुई उसने युद्ध की आशंकाओं पर पूर्ण विराम लगा दिया है.

सोल/प्योंगयांग: अभी पिछले साल ही नॉर्थ कोरिया ने एक मिलाइल बनाई जो अमेरिकी ज़मीन तक मार करने की क्षमता रखती है. ऐसी मिसाइलों के बनाए जाने से लेकर लगातार हो रहे परमाणु परीक्षण की वजह से नॉर्थ कोरिया के किम जोंग उन और अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच जैसी तनातनी नज़र आ रही थी, उसकी वजह से लगा कि दोनों देशों के बीच एक बार फिर भयंकर युद्ध की आशंका है.

वहीं इसकी भी पूरी संभावना जताई जा रही थी कि अगर अमेरिका और साउथ कोरिया युद्ध की शुरुआत करते हैं तो रूस और चीन एक बार फिर नॉर्थ के साथ कंधे से कंधा मिला सकते हैं जिससे विश्व युद्ध की स्थिति बन सकती है.

लेकिन अचानक से किम जोंग का हृदय परिवर्तन हुआ जिसके बाद उन्होंने अपनी बहन को साउथ कोरिया में हुए विंटर ओलंपिक में हिस्सा लेने के लिए भेजा. इसके बाद भी किसी को ये उम्मीद नहीं थी कि नॉर्थ कोरिया इतनी तेज़ी से अमेरिका और साउथ कोरिया से अपने रिश्ते सुधारने की कवायद में लग जाएगा. लेकिन अब जब उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन और दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन के बीच जो मुलाकात हुई उसने युद्ध की आशंकाओं पर पूर्ण विराम लगा दिया है.

दोस्ती में बदलने जा रही है ऐतिहासिक दुश्मनी- पढ़ें, नॉर्थ और साउथ कोरिया के बीच 70 सालों तक चले युद्ध की पूरी कहानी 26 सितंबर 1950 को ली गई इस तस्वीर में आप एक बच्ची को देख सकते हैं. कोरियाई युद्ध ने इसे अनाथ कर दिया था. युद्ध के दंश से बिलखती इस बच्ची की ये तस्वीर साउथ कोरिया के Inchon में ली गई थी.

आपको बता दें कि पूरी दुनिया की नजरें इस ऐतिहासिक बैठक पर टिकी हुई थीं. 1953 में समाप्त हुए कोरियाई युद्ध के बाद पहली बार कोरियाई देशों के नेता आपस में मिले हैं. यह मुलाकात दोनों देशों की सीमा पर बने डिमिलिट्राइज़ जोन यानि डीएमजेड पर हुई. डीएमजेड में बने पनमूनजेओम गांव के 'पीस हाउस' में किम जोंग और साउथ कोरिया के राष्ट्रपति मून जे इन मिले. ये क्षण सच में ऐतिहासिक है. आइए आपको सरल भाषा में समझाते हैं कि सन् 1950 में शुरू हुए युद्ध में किस तरह से अब तक एक दूसरे के साथ उल्झे रहे हैं साउथ और नॉर्थ कोरिया-

दोस्ती में बदलने जा रही है ऐतिहासिक दुश्मनी- पढ़ें, नॉर्थ और साउथ कोरिया के बीच 70 सालों तक चले युद्ध की पूरी कहानी कोरियाई युद्ध के दौरान नॉर्थ कोरियाई फौज की टैंक रेजिमेंट कुछ ऐसी दिखती थी.

  • कोरियाई प्रायद्वीप में युद्ध की शुरुआत 25 जून 1950 के उस हमले के बाद हुई जो नॉर्थ कोरिया ने साउथ कोरिया पर किया था.
  • इस युद्ध में नॉर्थ कोरिया को चीन और रूस का समर्थन हासिल था. वहीं साउथ कोरिया को अमेरिका का समर्थन हासिल था.
  • युद्ध शुरू होने से पहले दोनों देशों के बीच बॉर्डर पर लगातार तनाव बना रहा और कई छोटे-बड़े टकराव हुए.
दोस्ती में बदलने जा रही है ऐतिहासिक दुश्मनी- पढ़ें, नॉर्थ और साउथ कोरिया के बीच 70 सालों तक चले युद्ध की पूरी कहानी इस तस्वीर में आप अमेरिकी फौज के एक जवान को देख सकते हैं.

  • साल 1910 से लेकर दूसरे विश्व युद्ध के अंत तक कोरियाई प्रायद्वीप पर जापान का राज था.
  • दूसरे विश्व युद्ध में अमेरिका ने जब 1945 के अगस्त महीने में जापान के नागासाकी पर परमाणु बम गिराया तब सोवियत यूनियन (अब रूस) ने भी जापान के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया.
  • ये युद्ध अमेरिका से हुए एक समझौते के तहत छेड़ा गया. इस युद्ध के परिणाम स्वरूप कोरियाई प्रायद्वीप के नॉर्थ में जापान का राज समाप्त हो गया.
  • वहीं जापान की हार के बाद अमेरिका ने कोरियाई प्रायद्वीप के साउथ में अपनी सेना तैनात कर दी.
  • सन् 1948 तक अमेरिका और सोवियत यूनियन के बीच शीत युद्ध यानी कोल्ड वॉर शुरू हो गया.
  • नतीजतन, पहले से अमेरिका (साउथ) और सोवियत यूनियन (नॉर्थ) के कब्ज़े में पड़ा कोरियाई प्रायद्वीप दो टुकड़ों में बंट गया.
  • दोनों देशों में दो सरकारें आ गईं. एक तरफ साउथ कोरिया में अमेरिका आधारित पूंजीवादी (Capitalism) व्यवस्था की नींव पड़ी, वहीं दूसरी तरफ नॉर्थ कोरिय में सोवियत यूनियन आधारित साम्यवाद (Communism) की नींव पड़ी.
  • नॉर्थ और साउथ दोनों ही तरफ की सरकारें ये दावा करने लगीं कि पूरे कोरिया पर उनका हक है और दोनों ने ही कभी अमेरिका और सोवियत यूनियन के बनाए बॉर्डर को नहीं माना.
  • ये स्थिति तब युद्ध में तब्दील हो गई जब नॉर्थ कोरियाई फौज ने 25 जून 1950 को चीन और रूस के समर्थन से साउथ के खिलाफ जंग छेड़ दी.
  • यूएनएससी ने इसे साउथ कोरिया के खिलाफ जंग माना और ऐसी फौज तैयार की जो नॉर्थ कोरिया के खिलाफ ये जंग लड़ सके.
  • यूएन के 21 सदस्य देशों ने अपनी फौज को यूएन के इस प्लान का हिस्सा बनाने के लिए भेज दिया.
  • इसमें अमेरिका के सबसे ज़्यादा यानी 90% फौजी शामिल थे.
दोस्ती में बदलने जा रही है ऐतिहासिक दुश्मनी- पढ़ें, नॉर्थ और साउथ कोरिया के बीच 70 सालों तक चले युद्ध की पूरी कहानी 21 अक्टूबर 1950 को ली गई इस तस्वीर में आप USS Missouri युद्धपोत को देख सकते हैं. तस्वीर में साफ नज़र आ रहा है कि कैसे ये अपने 16 इंच के गन से नॉर्थ कोरिया पर फायरिंग कर रहा है.

  • युद्ध के दो महीने बाद अमेरिका और साउथ कोरिया हार की कगार पर थे.
  • फिर 1950 के सितंबर में अमेरिका ने Incheon पर हमला करके नॉर्थ कोरिया की फौज के बड़े हिस्से को अलग कर दिया.
  • नॉर्थ कोरिया की बाकी की फौज को इस झटके के बाद अपने देश लौटना पड़ा.
  • इसके बाद युद्ध में बढ़त और पीछे हटने का सिलसिला चलता रहा.
  • इस युद्ध के दौरान अमेरिका ने नॉर्थ कोरिया पर जमकर बम बरसाए.
  • ये पहला युद्धा था जिसमें एयर टू एयर यानी हवा में भी जमकर युद्ध हुआ.
दोस्ती में बदलने जा रही है ऐतिहासिक दुश्मनी- पढ़ें, नॉर्थ और साउथ कोरिया के बीच 70 सालों तक चले युद्ध की पूरी कहानी सन् 1952 की इस तस्वीर में अमेरिकी एयरफोर्स के F-86 विमान नज़र आ रहे हैं. इस युद्ध में दोनों तरफ से जमकर एयरफोर्स का इस्तेमाल हुआ था.

ये युद्ध 27 जुलाई 1953 को युद्धविराम पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद जाकर रूक गया. इस युद्धविराम के तहत एक ऐसा ज़ोन बनाया गया जहां दोनों में से किसी देश की सेना नहीं होगी. इस दौरान किसी शांति समझौते पर हस्ताक्षर नहीं किया गया था. युद्धविराम पर हुए हस्ताक्षर के बाद से दोनों कोरियाई देश लगातार युद्ध की स्थिति में रहे हैं. इस दौरान नॉर्थ ने अमेरिकी कहर से बचने के लिए लगातार अपना परमाणु कार्यक्रम जारी रखा और पिछले साल आधा दर्जन के करीब मिसाइल परीक्षण किए जिनमें परमाणु और हाइड्रोजन बमों के परीक्षण भी शामिल थे.

ऐसे मौके भी आए जब एक नॉर्थ कोरियाई मिसाइल जापान के ऊपर से होकर गुज़रा और दूसरे विश्व युद्ध के बाद पहली बार जापान को युद्ध के समय में आपातकाल की स्थिति वाला सायरन बजाना पड़ा, वहीं एक और मिसाइल का हाल ऐसा भी रहा कि वो नॉर्थ कोरिया से उड़ान भरकर नॉर्थ कोरिया में ही गिर गया. इस दौरान ट्रंप और किम के बीच जमकर कहा सुनी हुई और ट्रंप ने नॉर्थ कोरिया को बर्बाद करने के लिए 'फायर एंड फ्यूरी' (आग और तबाही) के इस्तेमाल जैसे बयान भी दिए.

ऐसे में जो एक बात काबिले तारीफ है वो ये है कि दुनियाभर में अपने अड़ियल रवैये के लिए मशहूर किम ने इस युद्ध को खत्म करने के लिए पहला कदम बढ़ाया. अगर ये स्थिति बेहतर होती है तो इतिहास में किम का नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा.

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