Mahakumbh 2025 in Pakistan: पाकिस्तान में भी महाकुंभ का जश्न, हिंदुओं का वीडियो वायरल, आप भी देखें
पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू श्रद्धालुओं के लिए प्रयागराज महाकुंभ में शामिल होना आसान नहीं है. इसलिए उन्होंने रहीमयार खान में अपना मेला आयोजित किया, जिसमें गंगाजल से स्नान और धार्मिक अनुष्ठान किए गए.
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Pakistan hindu celebrated Mahakumbh: भारत के प्रयागराज में इन दिनों महाकुंभ मेला चल रहा है, जिसे दुनिया का सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन माना जाता है. इसमें करोड़ों श्रद्धालु गंगा में स्नान करते हैं. पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू वीजा संबंधी समस्याओं के चलते इसमें शामिल नहीं हो पाते. इस मजबूरी के कारण पाकिस्तान के हिंदुओं ने अपना अलग महाकुंभ आयोजित किया, जिसमें वे गंगा जल से स्नान कर अपनी आस्था प्रकट कर रहे हैं.
पाकिस्तानी यूट्यूबर हरचंद राम ने अपने ब्लॉग में इस अनोखे आयोजन की झलक दिखाई. रहीमयार खान जिले में हुए इस महाकुंभ मेले में शामिल एक पुजारी ने बताया कि हम भारत के प्रयागराज नहीं जा सकते, इसलिए हमने यहां ही अपना महाकुंभ मना लिया. यह 144 साल बाद आया है, और शायद यह हमारे जीवन का पहला और आखिरी महाकुंभ होगा. महाकुंभ मेले में गंगा स्नान का विशेष महत्व है. चूंकि पाकिस्तानी हिंदू गंगा नदी तक नहीं पहुंच सकते, इसलिए गंगाजल को खासतौर पर लाया गया और स्थानीय पानी में मिलाया गया.
पाकिस्तान में कुंड स्नान विधि
पाकिस्तान में गंगा नदी के पानी से नहाने के लिए एक कुंड तैयार किया है, जिसके अंदर नॉर्मल पानी में गंगाजल मिलाकर रखा गया. श्रद्धालु उसमें खड़े होकर स्नान करते हैं. पुजारी उनके ऊपर जल डालते हैं, जिससे वे गंगा स्नान का अनुभव कर सकें.
भक्तों के लिए प्रसाद वितरण का भी आयोजन
स्नान के बाद श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद का भी प्रबंध किया गया था. सभी के लिए दलिया (खिचड़ी) बनाई गई, जिसे भक्तों को प्रसाद के रूप में वितरित किया गया. धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान भक्तों ने अपने गुरु के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लिया. छोटे स्तर पर आयोजित इस महाकुंभ में श्रद्धालुओं का उत्साह देखने लायक था. स्नान करते समय एक श्रद्धालु ने कहा कि हम प्रयागराज नहीं जा सकते, लेकिन गंगाजल के साथ स्नान करके हमें वही अनुभूति हो रही है.
मजबूरी में बनी एक नई परंपरा
पाकिस्तान में हिंदू समुदाय की यह पहल उनकी आस्था और विश्वास की गहरी जड़ों को दर्शाती है. यह आयोजन दिखाता है कि धर्म और श्रद्धा सीमाओं से परे होती हैं. जब प्रयागराज नहीं जा सके, तो खुद का महाकुंभ बना लिया. यह धार्मिक सहिष्णुता, परंपरा और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन गया है.
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