उधर पीएम मोदी अमेरिका गए, इधर शहबाज शरीफ ने छेड़ दिया कश्मीर मुद्दा, तुर्किए बोला- पाकिस्तान के प्रयासों को समर्थन...
राष्ट्रपति एर्दोगन ने पाकिस्तान के साथ संबंधों को बढ़ावा देने में गहरी दिलचस्पी दिखाते हुए कहा कि हमारी परिषद के सातवें सत्र में हम अपने संबंधों को और मजबूत करने पर सहमत हुए हैं.

तुर्किये के राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगन और पाकिस्तान ने गुरुवार (13 फरवरी, 2025) को फिर कश्मीर का राग अलापा. एर्दोगन का कहना है कि तुर्किए कश्मीर के मसले को सुलझाने के लिए पाकिस्तान के प्रयासों का समर्थन करते हैं. उन्होंगे कहा कि कश्मीर मुद्दे को भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए, जिसमें कश्मीरी लोगों की आकांक्षाओं पर उचित विचार किया जाए.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अमेरिकी दौरे के बीच राष्ट्रपति एर्दोगन दो दिवसीय यात्रा पर पाकिस्तान पहुंचे हैं. राष्ट्रपति एर्दोगन ने पाक पीएम शहबाज शरीफ के साथ आमने-सामने की वार्ता और प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद यह टिप्पणी की. दोनों पक्षों के बीच 24 समझौतों समेत एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुआ. इसके बाद एर्दोगन ने मीडिया को दिये बयान में कश्मीर मुद्दे पर बात की. एर्दोगन ने कहा कि वह कश्मीर मुद्दे को सुलझाने के लिए पाकिस्तान के प्रयासों का समर्थन करते हैं. उन्होंने कहा कि कश्मीर मुद्दे का हल ऐसी बातचीत से निकल सकता है, जो संयुक्त राष्ट्र के फैसलों और कश्मीर के लोगों की महत्वकांक्षा के अनुरूप हो.
एर्दोगन ने कहा, 'हमारा राष्ट्र, अतीत की तरह आज भी हमारे कश्मीरी भाइयों के साथ एकजुटता के साथ खड़ा है.' भारत ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि केंद्रशासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख देश का अभिन्न अंग थे, हैं और ‘हमेशा रहेंगे’. भारत की ओर से 5 अगस्त, 2019 को संविधान के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने, जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में खटास आ गई है.
राष्ट्रपति एर्दोगन ने पाकिस्तान के साथ संबंधों को बढ़ावा देने में भी गहरी दिलचस्पी दिखाई. उन्होंने कहा, 'हमारी परिषद के सातवें सत्र में, जिसे हमने अभी-अभी समाप्त किया है, हम अपने संबंधों को और मजबूत करने पर सहमत हुए हैं. इस यात्रा के दौरान, हमने व्यापार, जल संसाधन, कृषि, ऊर्जा, संस्कृति, परिवार और सामाजिक सेवाओं के साथ-साथ विज्ञान, बैंकिंग, शिक्षा, रक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्रों में कुल 24 समझौतों और सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर किए हैं.'
उधर, शहबाज शरीफ ने कहा कि तुर्किए ने कश्मीर के मामले में हमेशा पाकिस्तान के पक्ष का समर्थन किया है. उन्होंने कहा कि एर्दोगन इस्लामिक समाज के बेहद जरूरी और सम्मानित नेता हैं. उन्होंने हमेशा गाजा, फिलिस्तीन और कश्मीर के लोगों के अधिकारों के लिए आवाज बुलंद की है. पाक पीएम ने कहा कि एर्दोगन बोलते हैं तो इस्लामिक दुनिया के लोग ही नहीं, बल्कि पूरा विश्व उनकी बातों को ध्यान से सुनता है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान भी साइप्रस को लेकर हमेशा तुर्किए के रुख का समर्थन करेगा.
तुर्किए और साइप्रस के बीच पांच दशक पुराना विवाद है. साल 1974 में तुर्किए ने साइप्रस पर हमला किया और द्वीप के एक तिहाई हिस्से पर कब्जा कर लिया. इसके बाद ग्रीक और तुर्किए के बीच विभाजन हो गया. तब से ग्रीक और तुर्किए समुदायों के बीच तनाव रहता है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर साइप्रस को मान्यता प्राप्त है, लेकिन तुर्किए और उसका समर्थन करने वाले देश ऐसा नहीं मानते हैं.
इस मौके पर शहबाज शरीफ ने कहा कि पाकिस्तान एर्दोगन का दूसरा घर है और यहां पांच साल बाद उनका फिर से आना अद्भुत है. उन्होंने भूकंप और बाढ़ के दौरान पाकिस्तान के साथ खड़े रहने के लिए तुर्किये का आभार जताया. शहबाज ने कहा, 'आज आपकी पाकिस्तान यात्रा ने हमारे भाईचारे के संबंधों को एक नया ऊंचाई दी है.'
प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने सुबह-सुबह नूर खान हवाई अड्डे पर एर्दोगन का स्वागत किया. तुर्किये के राष्ट्रपति के साथ प्रथम महिला एमीन एर्दोगन और निवेशकों और व्यापार जगत के लोगों का एक प्रतिनिधिमंडल भी था. एर्दोगन और शहबाज ने प्रधानमंत्री आवास पर एक पौधा भी लगाया. सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने भी एर्दोगन से मुलाकात की.
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